गाड़ी खुद चलाकर घूमने का मज़ा अलग होता है। न ड्राइवर का इंतज़ार, न रास्ते पर किसी की रोक टोक। यह रेटिंग उन लोगों के लिए बनी है जो भारत में सेल्फ ड्राइव कार किराया सेवाएं पहली बार आज़माना चाहते हैं, या पुरानी कंपनी से परेशान होकर नई कंपनी खोज रहे हैं। वीकेंड की छोटी ट्रिप, पहाड़ों का लंबा रास्ता, या महीने भर की ज़रूरत, हर हाल के लिए यहाँ विकल्प हैं।
चुनाव करते समय कुछ चीज़ों पर ध्यान दिया गया। किराया घंटे के हिसाब से है या दिन के, किलोमीटर पैकेज कितना खुला है, पेट्रोल किसका, सिक्योरिटी डिपॉजिट कितना और वापस कितनी जल्दी आता है। इसके बाद देखा गया कि गाड़ी घर तक आती है या हब से लेनी पड़ती है, बीमा और रोडसाइड मदद का इंतज़ाम कैसा है, और कंपनी कितने शहरों में काम करती है। छोटी क्षेत्रीय कंपनियाँ भी शामिल हैं, क्योंकि केरल या कोयंबटूर में उनका दाम और सर्विस बड़े ब्रांड से बेहतर निकलता है।
जगहों का क्रम संपादकों ने तय नहीं किया, वह पाठकों के वोट से बनता है। इसलिए ऊपर वाला नाम आँख बंद करके न चुनें। हर कार्ड में फायदे, नुकसान और लोगों के अनुभव लिखे हैं, उन्हें पढ़कर अपने शहर और अपने बजट के हिसाब से फैसला करें।
ज़ूमकार 2013 में बेंगलुरु से शुरू हुई और आज देश की सबसे जानी पहचानी सेल्फ ड्राइव सर्विस है। कंपनी की अपनी गाड़ियाँ बहुत कम हैं, ज़्यादातर कारें आम लोगों की हैं जो होस्ट बनकर अपनी गाड़ी किराये पर देते हैं। बुकिंग पूरी तरह ऐप से होती है, चाबी होस्ट से मिलती है, किराया घंटे या दिन के हिसाब से लगता है और किलोमीटर पैकेज अलग से चुनना पड़ता है। पेट्रोल किराये में नहीं जुड़ा होता। कंपनी 2023 में अमेरिकी शेयर बाज़ार नैस्डैक पर सूचीबद्ध हो चुकी है।
छोटे शहरों में भी गाड़ी मिल जाना इसका सबसे बड़ा फायदा है, वहाँ बाकी बड़ी कंपनियाँ नहीं पहुँचीं। नुकसान भी साफ है: गाड़ी की हालत होस्ट पर निर्भर करती है, कोई साफ सुथरी कार देता है, कोई खटारा। जिन लोगों को तय स्टैंडर्ड चाहिए, उन्हें कंपनी की अपनी फ्लीट वाली सर्विस ज़्यादा जमेगी।
बेंगलुरु, अंजनेया टेक्नो पार्क, एचएएल ओल्ड एयरपोर्ट रोड, कोडिहल्ली, 560008
रेव की शुरुआत 2015 में गुड़गांव से हुई थी। खास बात दरवाज़े तक डिलीवरी है, गाड़ी घर या दफ्तर के पते पर आ जाती है और वहीं से वापस ले ली जाती है। किराये में दो तरह के विकल्प मिलते हैं, पेट्रोल के साथ और पेट्रोल के बिना, और लंबी ट्रिप के लिए अनलिमिटेड किलोमीटर वाला पैक भी है। घंटों के किराये के अलावा महीने की सब्सक्रिप्शन और साल भर की योजना चलती है, जिसमें सर्विसिंग और बीमा कंपनी संभालती है। सर्विस दिल्ली एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई, पुणे, जयपुर समेत बीस से ज़्यादा शहरों में है।
जिसे कार खरीदनी नहीं है पर रोज़ चाहिए, उसके लिए सब्सक्रिप्शन ठीक बैठती है। एक शहर से दूसरे शहर छोड़ने वाली वन वे बुकिंग भी है, जो शिफ्टिंग के काम आती है। छुट्टियों में दाम तेज़ी से चढ़ते हैं, इसलिए बुकिंग पहले करना समझदारी है।
माइल्स दिल्ली की कारज़ॉनरेंट का सेल्फ ड्राइव ब्रांड है और 2013 से चल रहा है। कारज़ॉनरेंट सालों से कॉर्पोरेट कैब का काम करती आई है, इसलिए गाड़ियों की देखभाल का ढांचा पहले से बना हुआ है। फ्लीट में छोटी हैचबैक से लेकर सेडान, एसयूवी, कुछ लग्ज़री कारें और इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भी हैं। बुकिंग घंटे, दिन, हफ्ते या महीने के हिसाब से होती है, एयरपोर्ट से गाड़ी लेने की सुविधा कई शहरों में मिलती है।
शादी या किसी खास मौके पर बड़ी गाड़ी चाहिए तो यहाँ चुनने के लिए काफी कुछ है। बजट यात्रियों को दाम थोड़े ऊँचे लग सकते हैं, और डिपॉजिट भी छोटी कंपनियों से ज़्यादा बैठता है। जिन शहरों में हब कम हैं, वहाँ पिकअप के लिए दूर जाना पड़ सकता है।
नई दिल्ली, वीडियोकॉन टॉवर, झंडेवालान एक्सटेंशन, 110055
माईचॉइस़ जापान की लीज़िंग कंपनी ओरिक्स के भारतीय कारोबार का सेल्फ ड्राइव ब्रांड है, दफ्तर मुंबई के अंधेरी में है। ओरिक्स सालों से गाड़ियाँ लीज़ पर देती आई है, इसलिए फ्लीट का रखरखाव कंपनी खुद करती है और गाड़ियाँ किसी बाहरी मालिक की नहीं होतीं। किराया घंटे और दिन के पैकेज में मिलता है, साथ में तीन महीने से लेकर लंबे समय तक की सब्सक्रिप्शन भी है जिसमें बीमा और सर्विसिंग शामिल रहती है। मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों में सेवा चलती है।
जिनको भरोसे वाली, तय हालत वाली गाड़ी चाहिए, उनके लिए यह विकल्प ठीक है। छोटे शहरों और पहाड़ी रूट पर उपलब्धता कम है। कागज़ी काम और डिपॉजिट की प्रक्रिया ऐप वाली नई कंपनियों से थोड़ी लंबी लगती है।
मुंबई, प्लॉट 94, मरोल को ऑपरेटिव इंडस्ट्रियल एस्टेट, अंधेरी कुर्ला रोड, अंधेरी पूर्व, 400059
ज़ाइमो खुद गाड़ियाँ नहीं रखती, यह जोड़ने वाला मंच है। एक ही जगह पर कई किराया कंपनियों के दाम सामने आ जाते हैं और सबसे सस्ता विकल्प चुना जा सकता है। कंपनी का दावा है कि पचास से ज़्यादा शहरों में तीस हज़ार से ऊपर गाड़ियाँ इसके नेटवर्क में हैं। हैचबैक से एसयूवी, लग्ज़री कार और इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ, सब जुड़ी हैं। घंटों की बुकिंग, आउटस्टेशन ट्रिप और महीने की सब्सक्रिप्शन तीनों चलती हैं, दरवाज़े तक डिलीवरी या हब से खुद लेने का विकल्प रहता है।
दाम की तुलना करने वालों के लिए यह अच्छी शुरुआत है, खासकर तब जब शहर में कोई बड़ा ब्रांड न हो। पर गाड़ी असल में किसी पार्टनर की होती है, तो हालत और व्यवहार हर जगह एक जैसा नहीं मिलता। शिकायत होने पर दो जगह बात करनी पड़ सकती है, मंच से और वेंडर से।
इंडसगो केरल की सेल्फ ड्राइव कंपनी है, मुख्य कारोबार कोच्चि से चलता है और कन्नूर, कोझिकोड, तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों के साथ चेन्नई में भी गाड़ियाँ मिलती हैं। किराया 120, 240 और 480 किलोमीटर के पैकेज में बंटा है, तय सीमा से ज़्यादा चलने पर प्रति किलोमीटर पैसा लगता है। गाड़ी एयरपोर्ट पर या घर के पते पर पहुँचा दी जाती है, चौबीस घंटे सड़क पर मदद और बीमा साथ रहता है। फ्लीट में हैचबैक, सेडान, एसयूवी और कुछ महंगी गाड़ियाँ हैं।
केरल घूमने वालों के लिए यह सुविधाजनक है, मुन्नार और अलेप्पी जैसे रूट पर टैक्सी से सस्ता पड़ता है। उत्तर भारत में यह काम नहीं करती, इसलिए वहाँ के यात्रियों को दूसरी कंपनी देखनी होगी। सीज़न में, खासकर ओणम और दिसंबर में, अच्छी गाड़ियाँ जल्दी बुक हो जाती हैं।
कोच्चि, केरल
ऑनरोड्ज़ दक्षिण भारत की कंपनी है, शुरुआत कोयंबटूर से हुई। चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, त्रिची, थेनी, सेलम, मैसूर और बेंगलुरु में गाड़ियाँ उपलब्ध हैं। बुकिंग ऐप और वेबसाइट दोनों से होती है, गाड़ी घर तक पहुँचाने का इंतज़ाम है और फोन पर बात करके भी सौदा तय हो जाता है, जो पहली बार किराये पर लेने वालों को आसान लगता है। फ्लीट में स्विफ्ट, बलेनो जैसी आम गाड़ियों से लेकर इनोवा और थार तक शामिल हैं। दाम बड़े ऐप वाली कंपनियों से कम रहते हैं।
तमिलनाडु के अंदर घूमने और कोडैकनाल या ऊटी जैसे रूट के लिए यह ठीक बैठती है। बड़ी कंपनियों जैसी चमकदार ऐप नहीं है, कई बात फोन पर ही सुलझती है। उत्तर या पश्चिम भारत में सेवा नहीं है।
कोयंबटूर, तमिलनाडु
व्रूम ड्राइव सिर्फ बेंगलुरु में काम करती है और इसी वजह से शहर के भीतर इसकी पकड़ मज़बूत है। दो हब से गाड़ी उठाई जा सकती है, इसके अलावा शहर में दो सौ से ज़्यादा जगह डोरस्टेप डिलीवरी दी जाती है। यात्रा से करीब साढ़े तीन घंटे पहले तक बुकिंग हो जाती है, यानी अचानक बना प्लान भी चल जाता है। हैचबैक, सेडान और एसयूवी तीनों श्रेणियों में अनलिमिटेड किलोमीटर वाला विकल्प है, जो कूर्ग या चिकमगलूर की ट्रिप में हिसाब बचाता है।
लोकल सर्विस होने का फायदा यह है कि दिक्कत होने पर टीम जल्दी पहुँचती है। नुकसान भी वही, बेंगलुरु से बाहर पिकअप नहीं मिलेगा। फ्लीट बड़ी कंपनियों से छोटी है, लग्ज़री गाड़ी की उम्मीद यहाँ न रखें।
बेंगलुरु, कर्नाटक
इको रेंट अ कार 1996 में दिल्ली में तीन गाड़ियों से शुरू हुई थी और अब देश के साठ के करीब शहरों में काम करती है, फ्लीट तीन हज़ार गाड़ियों से ऊपर है। मुख्य कारोबार कॉर्पोरेट और ड्राइवर वाली कारों का है, पर सेल्फ ड्राइव किराया भी दिया जाता है। दिल्ली, मुंबई, गोवा, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़ और कोयंबटूर में स्विफ्ट, बलेनो, क्रेटा, इनोवा क्रिस्टा जैसी गाड़ियाँ मिलती हैं। कंपनी आईएसओ प्रमाणित है और लंबे किराये पर मोलभाव की जगह रहती है।
कई दिनों या महीनों की ज़रूरत हो तो दाम बातचीत से बेहतर बैठते हैं। कमज़ोरी यह है कि सेल्फ ड्राइव बुकिंग तुरंत ऐप से पक्की नहीं होती, फॉर्म भरने के बाद कंपनी का आदमी फोन करता है। जल्दी में एक दिन की गाड़ी चाहिए तो यह तरीका धीमा लगेगा।
नई दिल्ली, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, 110020
सेल्फड्राइव्स दिल्ली की किराया कंपनी है और इसका ज़ोर आम गाड़ियों के साथ महंगी और खुली छत वाली कारों पर है। हैचबैक और सेडान के अलावा एसयूवी, लग्ज़री सेडान और कन्वर्टिबल तक फ्लीट में मिलती हैं, जो शादी, फोटो शूट या किसी खास दिन के लिए किराये पर ली जाती हैं। बुकिंग वेबसाइट से या सीधे फोन पर होती है, गाड़ी दफ्तर से लेनी होती है या तय पते पर पहुँचाई जाती है। कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए लंबे समय के अनुबंध भी किए जाते हैं।
दिल्ली एनसीआर में महंगी गाड़ी थोड़े दिन के लिए चाहिए तो यहाँ देखने लायक है। लग्ज़री गाड़ियों पर डिपॉजिट भारी होता है और शर्तें सख्त रहती हैं। नेटवर्क एक ही इलाके तक सीमित है, दूसरे शहरों में गाड़ी छोड़ने की सुविधा नहीं है।
नई दिल्ली, दिल्ली एनसीआर