तंजावुर महाराजा सरफोजी सरस्वती महल पुस्तकालय की शुरुआत 1535 के आसपास नायक राजाओं के शाही संग्रह से मानी जाती है, और मराठा शासक सरफोजी द्वितीय के समय इसका सबसे बड़ा विस्तार हुआ। 1918 में यह जनता के लिए खोली गई और अब सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है। यहाँ तमिल, तेलुगु, संस्कृत, मराठी और अंग्रेज़ी की करीब सैंतालीस हज़ार पांडुलिपियाँ तथा ताड़पत्र सुरक्षित हैं, साथ में चिकित्सा, संगीत, ज्योतिष और साहित्य के दुर्लभ ग्रंथ, नक़्शे और चित्र। परिसर तंजावुर महल के भीतर है, इसलिए एक ही यात्रा में महल और पुस्तकालय दोनों देखे जा सकते हैं।
संस्कृत तथा तमिल पांडुलिपियों पर काम करने वाले विद्वानों और इतिहास के शौकीन यात्रियों के लिए यह जगह बनी है। रोज़मर्रा की पढ़ाई या नई किताबें उधार लेने की सोच रखने वाले पाठक को यहाँ काम भर की सामग्री नहीं मिलेगी। बुधवार और सरकारी अवकाश पर बंद रहती है, दोपहर में विराम होता है, और बड़ा हिस्सा संग्रहालय शैली में प्रदर्शित है।
पता: तंजावुर, महल परिसर, तमिलनाडु 613009
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