डेटिंग में अटके पुरुषों की मदद करने वाली कोचिंग भारत में अब एक अलग पेशा बन गई है। यह सूची उन्हीं सेवाओं की है, जो बातचीत, आत्मविश्वास और रिश्तों की समझ सिखाती हैं। काम की चीज उनके लिए, जो सालों से अकेले हैं, डेटिंग ऐप पर जवाब नहीं पाते या पहली मुलाकात के बाद बात आगे नहीं बढ़ा पाते।
चुनाव में देखा गया कि कोच असल में किस चीज पर काम कराता है: बोलचाल और बॉडी लैंग्वेज, ऐप की प्रोफाइल, चैट, या सीधे बाहर निकलकर अजनबियों से बात करने का अभ्यास। साथ में गिना गया प्रारूप और खर्च: एक पर एक सेशन, ग्रुप मेंटरशिप, रिकॉर्डेड कोर्स या बूटकैंप, फीस साफ बताई जाती है या पहले कॉल पर, भाषा हिंदी चलती है या सिर्फ अंग्रेजी, और भुगतान रुपये में है या डॉलर में। पुरुषों के लिए डेटिंग कोचिंग का बाजार नया है, इसलिए पुराने ग्राहकों के नतीजे और सार्वजनिक सामग्री भी परखी गई।
क्रम तय करने वाला संपादक नहीं, समुदाय है: वोट बदलते हैं, जगहें भी बदलती हैं। कार्ड में फायदे और नुकसान दोनों लिखे हैं, नीचे लोगों के अनुभव पढ़ें और अपना वोट डालें। जल्दबाजी में पैसा देने से पहले पहला परिचय कॉल जरूर लें, यही सबसे सस्ता तरीका है समझने का कि कोच आपके काम का है या नहीं।
भारतीय पुरुषों के लिए बनी कोचिंग सेवा, जिसका पूरा जोर आत्मविश्वास, बोलचाल और सामाजिक कौशल पर है। साइट पर तीन तरह के रास्ते दिए गए हैं: मास्टरक्लास, एक पर एक कोचिंग और बूटकैंप, जिसमें कोच के साथ बाहर निकलकर असली माहौल में अजनबियों से बात करने का अभ्यास कराया जाता है। ग्राहकों के नतीजे और सक्सेस स्टोरीज अलग पेज पर रखी गई हैं, यूट्यूब और फेसबुक पर नियमित सामग्री आती है।
काम का उन लड़कों के लिए, जो शर्म के कारण बातचीत शुरू ही नहीं कर पाते और किताबी सलाह से आगे नहीं बढ़े। जिनको तैयार लाइनें और तुरंत नतीजा चाहिए, उनके लिए नहीं: यहाँ हर हफ्ते घर से निकलकर अभ्यास करना पड़ता है। फीस साइट पर नहीं लिखी, पहले परिचय कॉल पर तय होती है, इसलिए बजट पहले से पूछ लेना ठीक रहेगा।
क्षितिज सेहरावत की कोचिंग, जो सिर्फ पुरुषों के साथ काम करती है और खुद को भारत की डेटिंग मेंटरशिप में सबसे आगे बताती है। ढाँचा सीढ़ीनुमा है: पहले मुफ्त डेटिंग रोडमैप कॉल, फिर मेंटरशिप के स्तर और "अट्रैक्शन डिकोडेड" जैसा कार्यक्रम, जिसमें ऐप की प्रोफाइल, चैट और आमने-सामने की बातचीत अलग-अलग सिखाई जाती है। साइट पर केस स्टडी और ग्राहकों की समीक्षाएँ अलग सेक्शन में हैं।
उन नौकरीपेशा पुरुषों के लिए ठीक, जिनके पास समय कम है और जो हर हफ्ते तय जवाबदेही चाहते हैं। जो बिना बात किए सिर्फ रिकॉर्डेड वीडियो खरीदना चाहते हैं, उन्हें यह ढाँचा भारी लगेगा, क्योंकि दाखिला आवेदन और कॉल के बाद ही मिलता है। सोशल मीडिया पर सामग्री बहुत है, उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोच मिलती है या नहीं।
प्रतीक जैन की एक पर एक कोचिंग, जो डेटिंग को तकनीक से ज्यादा व्यवहार और भावनाओं का मामला मानती है। साइट पर कार्यक्रमों का अलग पेज है, काम आमतौर पर लंबी अवधि के सेशन में होता है: लगाव की आदतें, बार-बार दोहराई जाने वाली गलतियाँ, बातचीत में सीमाएँ तय करना। इंस्टाग्राम खाता "a.note.to.men" पर बड़ा पाठक वर्ग है, वहीं से ज्यादातर लोग आते हैं।
फायदेमंद उनके लिए, जिनके रिश्ते बनते हैं पर टिकते नहीं, या जो ब्रेकअप के बाद फिर से शुरुआत कर रहे हैं। जिन्हें केवल पहली मुलाकात तक पहुँचने की तरकीबें चाहिए, उनके लिए रफ्तार धीमी लगेगी, क्योंकि जोर भीतर की आदतों पर रहता है। सेशन ऑनलाइन होते हैं, इसलिए शहर की बंदिश नहीं, लेकिन तारीखें पहले से बुक करनी पड़ती हैं।
हर्ष जोशी की सेवा खुद को रिलेशनशिप स्ट्रैटेजी और डेटिंग मनोविज्ञान कहती है, यानी काम व्यवहार के कारणों से शुरू होता है, तरकीबों से नहीं। ग्राहक पुरुष हैं, सलाह ऑनलाइन दी जाती है, और साइट का लहजा जानबूझकर ठंडा है: कोई बड़बोला वादा नहीं, कोई गिनती नहीं कि कितनी लड़कियों से बात होगी। सामग्री में मोबाइल पर होने वाली डेटिंग, चैट का बर्ताव और अपेक्षाओं का प्रबंधन ज्यादा आता है।
पढ़े-लिखे शहरी पुरुषों के लिए सही, जिन्हें भाषण नहीं, ठोस विश्लेषण चाहिए। जिनको हर हफ्ते धक्का देने वाला कोच चाहिए, उनके लिए यह शैली शायद बहुत शांत लगेगी। सेवा छोटी है, इसलिए बड़े संस्थान जैसा सहारा, समुदाय और कार्यक्रमों की भीड़ यहाँ नहीं मिलेगी, बदले में बात सीधे कोच से होती है।
जसकरण सिंह का कार्यक्रम पुरुषों के लिए डेटिंग और रिश्तों की कोचिंग देता है, और इसकी पहुँच सोशल मीडिया से बनी है: इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर रोज छोटे वीडियो। खास बात यह कि गूगल प्ले पर इसका अलग ऐप भी है, जिसमें पाठ, सबक और समुदाय एक जगह मिलते हैं। सामग्री में चैट के जवाब, पहली मुलाकात की तैयारी और आत्मसम्मान से जुड़े सवाल ज्यादा आते हैं।
शुरुआती लोगों के लिए सस्ता रास्ता, क्योंकि मुफ्त वीडियो से काफी काम चल जाता है और उसके बाद ही पैसा लगाना पड़ता है। जिन्हें व्यक्तिगत, बंद कमरे वाली मेंटरशिप चाहिए, उन्हें भीड़ वाला प्रारूप अखर सकता है। ऐप और सामग्री अंग्रेजी में है, हिंदी मिश्रण वीडियो में मिलता है, लिखित सामग्री में कम।
यधुवीर सिंह का समुदाय आधारित कार्यक्रम, जो स्कूल प्लेटफॉर्म पर चलता है: सदस्यता लो, पाठ और चर्चा तक पहुँच मिलती है, सवाल सीधे समूह में पूछे जाते हैं। कोच के यूट्यूब चैनल पर लंबे वीडियो और पॉडकास्ट हैं, जिनमें आधुनिक डेटिंग, पहला संपर्क और आत्मविश्वास पर बात होती है, यहीं से लोग समुदाय में आते हैं।
सस्ते विकल्प के तौर पर ठीक: महीने की सदस्यता एक पर एक कोचिंग से कम पड़ती है और साथ चलने वाले लोगों का साथ मिलता है। नुकसान साफ है, ध्यान बँटा हुआ रहता है और अनुशासन खुद बनाना पड़ता है, वरना पाठ पड़े रह जाते हैं। जिन्हें व्यक्तिगत निगरानी और सख्त जवाबदेही चाहिए, उन्हें अलग से सेशन लेने होंगे।
मुंबई की कोचिंग सेवा, जिसे आइली सेगेटी चलाती हैं और जिसकी चर्चा भारतीय मीडिया में कई बार हुई है। यहाँ डेटिंग को अकेला विषय नहीं माना जाता: सेशन में नजदीकी, संवाद, शरीर की भाषा और साँस के अभ्यास तक शामिल होते हैं। पुरुष ग्राहकों के साथ अलग काम होता है, जिसमें पहली मुलाकात की झिझक, छूने की अनुमति और सीमाओं की समझ पर जोर रहता है। कार्यशालाएँ और ऑनलाइन सेशन दोनों चलते हैं।
उन पुरुषों के लिए उपयोगी, जो तरकीबों से ऊब चुके हैं और रिश्ते के भावनात्मक हिस्से में अटके हैं। जो सिर्फ ऐप पर जवाब बढ़ाने की तकनीक ढूँढ रहे हैं, उनके लिए यह पता गलत रहेगा। सेवा सिर्फ पुरुषों के लिए नहीं है, इसलिए कार्यक्रम का हिस्सा जोड़ों और महिलाओं पर भी खर्च होता है।
मुंबई, महाराष्ट्र
न्यूयॉर्क से चलने वाली कोचिंग टीम, जिसने भारतीय ग्राहकों के लिए अलग पेज बनाया है और मुंबई के पुरुषों को ऑनलाइन सेशन देती है। काम का ढाँचा पश्चिमी है: बातचीत की शुरुआत, आँख का संपर्क, आत्मविश्वास की आदतें और डेट की योजना, सब अलग-अलग सबक की तरह। टीम का पॉडकास्ट सालों से चल रहा है, उसमें मनोवैज्ञानिकों और लेखकों के साथ लंबी बातचीत मिलती है, जिससे शैली का अंदाजा पहले ही लग जाता है।
काम का उन पुरुषों के लिए, जो अंग्रेजी में सहज हैं और विदेश में पढ़ाई या नौकरी की तैयारी में हैं। भारतीय परिवार, अरेंज मैरिज का दबाव और स्थानीय माहौल की समझ यहाँ कम मिलेगी, यही सबसे बड़ी कमी है। भुगतान डॉलर में होता है, इसलिए खर्च भारतीय कोच से ज्यादा बैठता है, और सेशन का समय अमेरिकी घड़ी के हिसाब से तय होता है।
यह सेवा खास तौर पर दक्षिण एशियाई और भारतीय मूल के पुरुषों के साथ काम करती है, इसलिए यहाँ वे सवाल उठते हैं जो आम पश्चिमी कोच छोड़ देते हैं: परिवार की अपेक्षाएँ, अरेंज मैरिज का दबाव, प्रवासी लड़कों का आत्मसम्मान। कोचिंग ऑनलाइन चलती है, साइट पर ग्राहकों की गवाहियों का अलग पेज है और भारतीय पुरुषों के लिए बना खास खंड भी।
फायदेमंद उन लोगों के लिए, जो विदेश में रहते हैं या भारत से बाहर डेट कर रहे हैं और सांस्कृतिक दोहरेपन में उलझे हैं। भारत के छोटे शहरों के माहौल के लिए सलाह हमेशा फिट नहीं बैठती, यह ध्यान रखना जरूरी है। पूरी बातचीत अंग्रेजी में होती है, फीस विदेशी मुद्रा में तय होती है, और सेशन के लिए समय का अंतर झेलना पड़ता है।
जेटी ट्रान की टीम बीस साल से एशियाई मूल के पुरुषों को डेटिंग सिखा रही है, और यही इसका सबसे बड़ा तर्क है: लंबा अनुभव और साफ पहचान। कार्यक्रम में ऑनलाइन कोर्स और बूटकैंप दोनों हैं, बूटकैंप में सड़क और बार में सीधे अभ्यास कराया जाता है, हालांकि ये आयोजन अमेरिका और यूरोप में होते हैं। जोर आत्मविश्वास, रूप-रंग की तैयारी और नस्लीय पूर्वाग्रह से निपटने पर रहता है।
भारत में रहने वाले पुरुषों के लिए इसका काम का हिस्सा ऑनलाइन कोर्स और वीडियो सामग्री है, बूटकैंप के लिए विदेश जाना होगा। जो लोग विदेश में पढ़ने या बसने जा रहे हैं, उनके लिए तैयारी के तौर पर ठीक बैठता है। शैली आक्रामक मानी जाती है, नरम सलाह चाहने वालों को लहजा चुभ सकता है।