कलारीपयट्टू सीखने का मन बना लिया हो, तो असली उलझन यह है कि किस कलारी में दाखिला लें। यह रेटिंग भारत के उन कलारीपयट्टू प्रशिक्षण केंद्रों की है जहाँ परंपरा के हिसाब से नियमित कक्षाएँ चलती हैं, सिर्फ पर्यटकों के लिए शो नहीं होते। शुरुआत करने वाले बच्चे, फिटनेस के लिए आए बड़े और लंबे कोर्स की तलाश में आए विदेशी छात्र, तीनों को यहाँ काम की जानकारी मिलेगी।
चयन में पहली शर्त यही रखी गई कि केंद्र आज सक्रिय हो और वहाँ गुरुक्कल के सीधे निर्देशन में मेय्यत्तारी से लेकर हथियारों तक का क्रम सिखाया जाता हो। इसके बाद देखा गया: उत्तरी, दक्षिणी या वल्लभट्ट शैली में से क्या पढ़ाया जाता है, कोर्स एक हफ्ते के हैं या साल भर के, रोज कितनी देर अभ्यास होता है, उझिच्चिल और मर्म चिकित्सा की सुविधा है या नहीं, बाहर से आने वाले छात्रों के ठहरने का इंतजाम कैसा है, और फीस तथा तेल का खर्च कितना खुलकर बताया जाता है। पुरानी विरासत को भी गिना गया, पर पुरानापन अकेले कोई गारंटी नहीं।
क्रम संपादकीय नहीं है: कौन ऊपर और कौन नीचे, यह पाठकों के वोट तय करते हैं, इसलिए सूची समय के साथ बदलती रहती है। हर कार्ड में खूबियाँ और कमियाँ अलग से दी गई हैं, उन्हें और नीचे लगे असली छात्रों के रिव्यू को साथ पढ़िए। दाखिले से पहले एक बार कलारी जाकर अभ्यास देखना सबसे भरोसेमंद जाँच है।
सी. वी. एन. कलारी, तिरुवनंतपुरम के ईस्ट फोर्ट में 1956 से चल रही है। इसकी नींव सी. वी. गोविंदनकुट्टी नायर गुरुक्कल ने रखी थी, और दक्षिण केरल में उत्तरी शैली का व्यवस्थित प्रशिक्षण देने वाली यह पहली कलारी मानी जाती है। दाखिला साल में दो बार होता है, बारिश से पहले जून में और विद्यारंभम के समय अक्टूबर में। लंबे कोर्स के अलावा तीन से छह महीने के छोटे कोर्स भी चलते हैं, और यह केंद्र आईसीसीआर की अंतरराष्ट्रीय छात्रवृत्ति वाले छात्रों को भी लेता है।
कलारी से जुड़ा मर्म चिकित्सा केंद्र इसी परिसर में है, इसलिए अभ्यास में चोट लगे तो इलाज बाहर ढूँढना नहीं पड़ता। जो पद्मनाभस्वामी मंदिर के इलाके में रहते हैं, उनके लिए जगह सुविधाजनक है। नुकसान यह है कि भीड़ ज्यादा रहती है और इलाज कराने वालों की कतार लगी रहती है, इसलिए पूरी तवज्जो चाहने वाले छात्र को यहाँ धैर्य रखना पड़ेगा। फोटो या वीडियो लेने की इजाजत पहले लेनी होती है।
तिरुवनंतपुरम, ईस्ट फोर्ट, फोर्ट पी.ओ., केरल 695023
नडक्कावु की सी. वी. एन. कलारी को के. नारायणन गुरुक्कल ने शुरू किया था और आज यह कोझिकोड में उत्तरी शैली का बड़ा केंद्र है। यहाँ पयट्टू के साथ मर्म चिकित्सा और तिरुम्मु की तीनों धाराएँ सिखाई और की जाती हैं: रक्ष तिरुम्मु, सुख तिरुम्मु और कच्च तिरुम्मु। इलाज के लिए तेल और दवाएँ कलारी में ही बनती हैं, और परिसर से जुड़े आयुष आयुर्वेद आश्रम में मरीज लंबे इलाज के लिए रुक सकते हैं, जहाँ शाकाहारी भोजन दिया जाता है।
विदेशी छात्रों की आवाजाही लगातार रहती है और फिल्मों तथा मंच कार्यक्रमों के लिए भी यहाँ के अभ्यासी बुलाए जाते हैं। घूमने आए लोगों के लिए गाइडेड टूर की व्यवस्था है, यानी एक दिन में झलक भी मिल सकती है। पर जो हफ्ते में दो दिन की हल्की क्लास चाहते हैं, उन्हें यह जगह सख्त लगेगी: सुबह का अभ्यास और तेल मालिश का क्रम छोड़ना यहाँ पसंद नहीं किया जाता।
कोझिकोड, ईस्ट नडक्कावु, केरल 673011
ई. एन. एस. कलारी की स्थापना 1954 में ई. एन. श्रीपति एंब्रांतिरी गुरुक्कल ने एर्नाकुलम के नेट्टूर में की थी। इसकी खास बात यह है कि यहाँ उत्तरी और दक्षिणी, दोनों पद्धतियाँ एक ही छत के नीचे पढ़ाई जाती हैं। कोर्स एक हफ्ते से एक साल तक के हैं, छपे नोट्स के साथ तय पाठ्यक्रम चलता है, और कोर्स वाले छात्रों के लिए सुबह और शाम, दिन में दो बार डेढ़ घंटे की कक्षा होती है। संस्था कलारीपयट्टू फेडरेशन ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त है।
बाहर से आने वालों को माँगने पर ठहरने की सुविधा मिल जाती है, और उझिच्चिल यानी तेल मालिश तथा मर्म चिकित्सा भी यहीं होती है। रोज एक घंटे का प्रदर्शन होता है, रविवार दोपहर तीन से सात बजे के बीच आने वाले लोग अभ्यास देख सकते हैं। परिसर में कलारी के मॉडल, किताबें और वीडियो भी रखे हैं। कमी यह है कि दो शैलियाँ साथ चलने से नए छात्र कभी उलझते हैं, इसलिए शुरू में ही तय कर लेना बेहतर है कि किस दिशा में जाना है।
एर्नाकुलम, नेट्टूर, एंब्रम मठम, केरल 682040
कडत्तनाडन कलारी संगम की शुरुआत 1949 में कोझिकोड जिले के वडकरा में श्रीनिवासन गुरुक्कल और उनके साथियों ने की थी। 1962 में श्रीनिवासन गुरुक्कल वायनाड आ गए, और 2000 में के. एफ. थॉमस गुरुक्कल ने मनंतवाडी के कम्मना में मौजूदा कलारी खड़ी की। आज वायनाड में इसकी तीन शाखाएँ हैं, जिन्हें पाँच गुरुक्कल मिलकर चलाते हैं, और संस्था का दावा है कि पाँच हजार से ज्यादा लोग यहाँ प्रशिक्षण ले चुके हैं।
नियमित कक्षाओं के अलावा स्कूलों के लिए सामूहिक कार्यशालाएँ और मंच प्रदर्शन भी होते हैं, इसलिए बच्चों के समूह को एक बार कला दिखानी हो तो यह अच्छा विकल्प है। वायनाड घूमने आए लोग छोटे कोर्स में शामिल हो सकते हैं। दिक्कत जगह की है: कम्मना पहाड़ी इलाके में है, नजदीकी शहर से आना जाना रोज करना मुश्किल पड़ता है, और बारिश के महीनों में अभ्यास का क्रम गड़बड़ाता है।
वायनाड, मनंतवाडी, कम्मना पी.ओ., केरल 670645
हिंदुस्तान कलारी संगम कोझिकोड के पुथियारा में नेताजी रोड पर है और इसे 1950 में वीरश्री सामी गुरुक्कल ने शुरू किया था, यानी संस्था सत्तर साल से ज्यादा पुरानी है। प्रशिक्षण के साथ मर्म और आयुर्वेद चिकित्सा भी होती है, उसी परिसर में धन्वंतरि आयुर्वेद अकादमी चलती है। यहाँ के कलाकारों की टीम में पयट्टू के अभ्यासी, तेय्यम कलाकार और वाद्य बजाने वाले शामिल हैं, जो देश और विदेश के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में नियमित बुलाए जाते हैं।
जिन्हें प्रदर्शन और मंच की तरफ बढ़ना है, उनके लिए यह माहौल फायदेमंद है, क्योंकि अभ्यास के साथ स्टेज का अनुभव भी मिल जाता है। वहीं जो खालिस आत्मरक्षा या फिटनेस के लिए आ रहे हैं, उन्हें शो की तैयारी वाले दिनों में कक्षाओं का समय बदलते रहना खटकेगा। परिसर शहर के भीतर है, जगह बड़ी नहीं, इसलिए बैच भरे रहते हैं।
कोझिकोड, पुथियारा, नेताजी रोड, केरल 673004
वल्लभट्ट कलारी संगम त्रिशूर जिले के चावक्काड में है और यह मध्य केरल की वल्लभट्ट शैली का सबसे जाना पहचाना घर है। इसे संकर नारायण मेनोन गुरुक्कल ने खड़ा किया, जिन्हें कलारीपयट्टू के लिए पद्मश्री मिला। पाठ्यक्रम पुराने क्रम में चलता है: पहले मेय्यत्तारी यानी शरीर साधना, फिर कोल्तारी में लकड़ी के हथियार, अंकत्तारी में धातु के हथियार और अंत में वेरुमकै यानी खाली हाथ की लड़ाई। मर्म चिकित्सा और आयुर्वेदिक मालिश भी यहीं उपलब्ध है।
जो शैली की शुद्धता को अहमियत देते हैं और नए तरीके से बदले रूप से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह केंद्र सबसे भरोसेमंद है। कलारी से जुड़े प्रशिक्षक बेंगलुरु और यूरोप तक कक्षाएँ चलाते हैं, जिससे लंबा अभ्यास जारी रखना आसान रहता है। कमजोरी है सूचना का ढीलापन: कोर्स और फीस की बात फोन पर ही साफ होती है, और चावक्काड छोटा कस्बा है, रुकने के विकल्प सीमित हैं।
त्रिशूर, चावक्काड, केरल 680506
कलारी गुरुकुलम बेंगलुरु में रंजन मुल्लरट्ट का केंद्र है। उन्होंने केरल के पी. के. बालन गुरुक्कल से प्रशिक्षण लिया, 1999 में कलारी अकादमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स शुरू की और 2010 में कलारी गुरुकुलम सोसाइटी बनाई। शहर में ब्रिगेड रोड के पास अकादमी है, चिक्कगुब्बी में आवासीय गुरुकुलम है, गोवा में भी कक्षाएँ चलती हैं। सात साल के बच्चे से साठ साल तक के लोग यहाँ बैच में शामिल होते हैं, और ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प भी है।
केरल जाकर महीनों रुकना मुमकिन न हो, तो महानगर में परंपरागत क्रम सीखने के लिए यह व्यावहारिक रास्ता है। आवासीय कार्यक्रम में छोटी अवधि में गहरा अभ्यास मिल जाता है। दूसरी तरफ, केंद्र मंच प्रदर्शन और कार्यशालाओं में बहुत व्यस्त रहता है, जिससे गुरु का सीधा ध्यान हर बैच को नहीं मिल पाता। बेंगलुरु की फीस भी केरल की कलारियों से ऊपर बैठती है।
बेंगलुरु, 25 वीएन प्लाजा, ब्रिगेड रोड क्रॉस, कर्नाटक 560025
कलारी केंद्रम दिल्ली 2008 से चल रहा है और कलारीपयट्टू के लिए आईसीसीआर से मान्यता प्राप्त है। दिल्ली एनसीआर में इसकी तीन शाखाएँ हैं: मयूर विहार, नोएडा सेक्टर 104 और कनॉट प्लेस। यहाँ मेय्यत्तारी से शुरू होकर हथियारों तक का क्रम केरल की परंपरा के हिसाब से पढ़ाया जाता है, नोएडा में केरल पद्धति की मालिश भी मिलती है, और जो आगे बढ़ना चाहें उनके लिए केरल में आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा जाता है। स्कूल कॉलेज के लिए कार्यशालाएँ और मंच शो अलग से होते हैं।
उत्तर भारत में रहने वाले छात्र के लिए यह सबसे सुलभ विकल्प है, क्योंकि छुट्टी लेकर केरल जाने की जरूरत नहीं पड़ती। दूर के शहरों वालों के लिए ऑनलाइन कक्षाएँ भी चलती हैं। कमी साफ है: महानगर की जगह की तंगी में पारंपरिक कुझी कलारी जैसा गड्ढेदार अखाड़ा हर शाखा में नहीं है, और हफ्ते में दो या तीन दिन की कक्षा से प्रगति धीमी रहती है।
नोएडा सेक्टर 104 और मयूर विहार, दिल्ली एनसीआर
माधव मठम सी. वी. एन. कलारी को 1974 में रामचंद्रन नायर ने शुरू किया था। मुख्य केंद्र तिरुवनंतपुरम के पप्पनमकोड में है, त्रिवेंद्रम सेंट्रल से करीब पाँच किलोमीटर दूर, और केरल के भीतर तथा बाहर इसकी शाखाएँ खुलीं। यहाँ उत्तरी शैली का प्रशिक्षण होता है और साथ ही पारंपरिक आयुर्वेदिक इलाज तथा मर्म चिकित्सा का बड़ा काम चलता है, इसी वजह से जोड़ों और नसों की तकलीफ वाले मरीज भी यहाँ भेजे जाते हैं।
शहर के भीतर रहकर नियमित कक्षा लेने वालों के लिए जगह ठीक बैठती है, और अभ्यास के दौरान चोट लगने पर इलाज उसी छत के नीचे मिल जाता है। मरीजों की आवाजाही ज्यादा होने का दूसरा पहलू यह है कि पयट्टू की कक्षा और चिकित्सालय का समय आपस में टकराता है, अखाड़े में जगह कम पड़ती है। अंग्रेजी में जानकारी भी सीमित मिलती है, बात मलयालम या हिंदी में फोन पर करनी पड़ती है।
तिरुवनंतपुरम, पप्पनमकोड, केरल 695018
अगस्त्यम कलारी तिरुवनंतपुरम के नेमोम में चलती है। यहाँ दक्षिणी शैली का कलारीपयट्टू सिखाया जाता है। परिवार की यह परंपरा 126 साल से ज्यादा पुरानी है और अब गुरुक्कल डॉ. एस. महेश इसे संभालते हैं, वे अपने घर की पाँचवीं पीढ़ी के अभ्यासी हैं। बच्चों, महिलाओं और बड़ी उम्र के लोगों के बैच अलग रखे जाते हैं। पाठ्यक्रम में मेइपयट्टू, चुवडु, वडिवु, खाली हाथ की तकनीक, लंबी लाठी और गदा आती हैं। शिक्षक बनने वालों के लिए एक साल का 600 घंटे का कोर्स है: दो महीने गुरुकुल में रहकर, बाकी दस महीने हाइब्रिड तरीके से।
बाहर से आने वाले छात्रों के लिए आवासीय बैच है, रहना और खाना वहीं मिलता है। साथ में कलारी चिकित्सा, उझिच्चिल और मर्म का इलाज भी होता है। जो सिर्फ फिटनेस और आत्मरक्षा चाहते हैं, उनके लिए छोटे प्रोग्राम और ऑनलाइन क्लास हैं। पूछताछ का समय सोमवार से शनिवार सुबह 7:30 से रात 8 बजे तक है। फीस पैकेज और दिनों के हिसाब से बदलती है, दाखिले से पहले फोन पर पूरा हिसाब पूछ लेना ठीक रहता है।
विलयिल विलाकोम, किडंगिल, नेमोम पी.ओ., तिरुवनंतपुरम, केरल 695020