ई. एन. एस. कलारी की स्थापना 1954 में ई. एन. श्रीपति एंब्रांतिरी गुरुक्कल ने एर्नाकुलम के नेट्टूर में की थी। इसकी खास बात यह है कि यहाँ उत्तरी और दक्षिणी, दोनों पद्धतियाँ एक ही छत के नीचे पढ़ाई जाती हैं। कोर्स एक हफ्ते से एक साल तक के हैं, छपे नोट्स के साथ तय पाठ्यक्रम चलता है, और कोर्स वाले छात्रों के लिए सुबह और शाम, दिन में दो बार डेढ़ घंटे की कक्षा होती है। संस्था कलारीपयट्टू फेडरेशन ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त है।
बाहर से आने वालों को माँगने पर ठहरने की सुविधा मिल जाती है, और उझिच्चिल यानी तेल मालिश तथा मर्म चिकित्सा भी यहीं होती है। रोज एक घंटे का प्रदर्शन होता है, रविवार दोपहर तीन से सात बजे के बीच आने वाले लोग अभ्यास देख सकते हैं। परिसर में कलारी के मॉडल, किताबें और वीडियो भी रखे हैं। कमी यह है कि दो शैलियाँ साथ चलने से नए छात्र कभी उलझते हैं, इसलिए शुरू में ही तय कर लेना बेहतर है कि किस दिशा में जाना है।
पता: एर्नाकुलम, नेट्टूर, एंब्रम मठम, केरल 682040
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