मिट्टी के बिना घर पर धनिया, पालक और लेटस उगाना अब मुश्किल काम नहीं है। हाइड्रोपोनिक्स ग्रो किट में पानी की टंकी, पोषक तत्व और जड़ों की जगह पहले से तैयार मिलती है, इसलिए शुरुआत करने वाले को ज़्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ती। यह रेटिंग उन लोगों के लिए है जिनके पास बालकनी, छत या सिर्फ़ एक किचन काउंटर है और जो ताज़ी पत्तेदार सब्ज़ी अपने हाथ से उगाना चाहते हैं।
चुनने में सबसे पहले यह देखा गया कि किट भारत में असल में बिकती है, Amazon.in, Flipkart या Meesho पर उसका अपना पेज मौजूद है। इसके बाद तुलना के काम की बातें: कितने पौधे लगते हैं, सिस्टम DWC है, NFT है या वर्टिकल एयरोपोनिक टावर, टैंक कितने लीटर का है, पंप और एलईडी ग्रो लाइट साथ आती है या नहीं, डिब्बे में बीज, न्यूट्रिएंट, कोको डिस्क और TDS मीटर मिलते हैं या अलग से खरीदने पड़ते हैं। बिजली का खर्च, सफ़ाई और रोज़ की देखभाल का समय भी हिसाब में लिया गया।
क्रम ऊपर से नीचे संपादकों ने तय नहीं किया, जगहें सामुदायिक वोट से बदलती रहती हैं। हर कार्ड में प्लस और माइनस साथ पढ़ें, फिर नीचे दिए उपयोगकर्ताओं के रिव्यू देखें। जो किट आपकी जगह, बजट और खाली समय से मेल खाती है, वही आपके लिए सही हाइड्रोपोनिक्स ग्रो किट है।
पहली बार हाइड्रोपोनिक्स आज़माने वालों के लिए बना बहुत सीधा सेटअप। डीप वॉटर कल्चर वाले एक चैनल में पाँच पौधे लगते हैं, जड़ें सीधे पानी में रहती हैं और छोटा एयरेशन पंप पानी में ऑक्सीजन घोलता रहता है। डिब्बे में चैनल, पंप, बीज, न्यूट्रिएंट, क्ले बॉल और कोकोपीट साथ आते हैं, यानी शुरू करने के लिए अलग से कुछ ढूँढना नहीं पड़ता। पालक, धनिया, लेटस और तुलसी जैसी चीज़ें इसमें अच्छी चलती हैं।
बालकनी की रेलिंग के पास या धूप वाली खिड़की के सामने रखने के लिए ठीक है, क्योंकि इसमें ग्रो लाइट नहीं है और रोशनी बाहर से चाहिए। पाँच पौधों से घर की पूरी सब्ज़ी नहीं निकलेगी, यह सीखने और सलाद वाली हरी पत्तियों के लिए है। पानी हर हफ़्ते जाँचना और दो हफ़्ते में बदलना पड़ता है, वरना जड़ों में बदबू आने लगती है।
यह किट न्यूट्रिएंट फ़िल्म टेक्नीक पर चलती है: पंप पतली धार में पोषक पानी चैनल के अंदर बहाता है और वही पानी घूमकर टंकी में लौट आता है। बीस नेट कप की जगह मिलती है, इसलिए एक बार में सलाद की अच्छी मात्रा निकल आती है। सेट छत और खुली बालकनी के लिए बना है, ढाँचा धूप में रखने के हिसाब से तैयार किया गया है।
पत्तेदार सब्ज़ी और हर्ब्स के लिए यह पाँच पौधों वाले छोटे किट से बड़ा कदम है। शर्त यह है कि जगह समतल हो और पास में बिजली का पॉइंट हो, क्योंकि पंप लगातार चलना चाहिए। लंबे बिजली कट वाले इलाक़ों में इन्वर्टर के बिना जोखिम रहता है, धार रुकते ही जड़ें सूखने लगती हैं। असेंबली में थोड़ा समय और सब्र लगता है, पहली बार में एक दो घंटे मान लीजिए।
रसोई की स्लैब पर रखने वाला बंद सिस्टम, जिसमें धूप की ज़रूरत ही नहीं पड़ती। छह लीटर की टंकी, फुल स्पेक्ट्रम एलईडी ग्रो लाइट और तीन ग्रो मोड मिलते हैं, यानी हर्ब, सब्ज़ी और फूल के लिए रोशनी अलग सेट की जा सकती है। स्टार्टर किट के साथ आता है, तो पहली फ़सल के लिए बाहर से कुछ जुटाना नहीं पड़ता। पंप पानी घुमाता रहता है, जड़ों तक ऑक्सीजन पहुँचती है।
फ़्लैट में रहने वालों के लिए सही, जहाँ बालकनी नहीं है या धूप दिन में एक घंटा भी नहीं आती। बदले में बिजली रोज़ चलती है और लाइट रात में हल्की चमकती रहती है, बेडरूम में रखना ठीक नहीं लगेगा। सीमित पॉड्स हैं, इसलिए यह शौक़ और ताज़ा हर्ब के लिए है, किचन की पूरी सप्लाई इससे नहीं बनेगी। न्यूट्रिएंट समय समय पर दोबारा खरीदने पड़ते हैं।
पाइप वाला घरेलू सेट, जिसमें कतार में बने छेदों में नेट कप बैठते हैं और पोषक पानी अंदर से बहता है। इसे घर के अंदर, खिड़की के पास या बालकनी में रखा जा सकता है। कंपनी इसे हर्ब और सलाद की हरी पत्तियों के लिए बेचती है, बिना मिट्टी और बिना कीटनाशक के। ढाँचा हल्का है, इसलिए साफ़ करने या जगह बदलने में दिक्कत नहीं होती।
जिनको छत नहीं मिली और जो कमरे में ही छोटा हरा कोना चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा पहला कदम है। भारी सब्ज़ियाँ जैसे टमाटर या मिर्च इस पाइप डिज़ाइन में ठीक से नहीं सधेंगी, जड़ों और वज़न के लिए जगह कम है। लाइट अलग से खरीदनी पड़ सकती है, अगर कमरे में रोशनी कम है। रिव्यू कम हैं, तो खरीदने से पहले पैकेज लिस्ट ध्यान से पढ़ लें।
दो गमलों वाला छोटा सेट, जिसमें जड़ें पानी में नीचे तक बढ़ती हैं और ऊपर वाला हिस्सा पौधे को टिकाए रखता है। साथ में पानी के स्तर का इंडिकेटर लगा है, इसलिए अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं रहती, देखकर ही पता चल जाता है कि पानी भरना है या नहीं। पंप नहीं है, बिजली नहीं चाहिए, बस समय पर पानी और न्यूट्रिएंट डालते रहें।
टेबल, स्टडी डेस्क या ऑफ़िस की खिड़की के लिए बना है। मनी प्लांट, पुदीना या तुलसी जैसे पौधे इसमें आराम से चलते हैं, पर सब्ज़ी उगाने की उम्मीद न रखें। कीमत कम है, तो यह हाइड्रोपोनिक्स को बिना खर्च आज़माने का सबसे सस्ता रास्ता है। बीज और न्यूट्रिएंट आम तौर पर अलग खरीदने पड़ते हैं, पैकेज लिस्ट पहले देख लें।
खड़ा टावर, जिसमें बारह पौधे एक के ऊपर एक लगते हैं और नीचे रखी टंकी से पंप पानी ऊपर भेजता है। ऊपर से पानी टपकते हुए हर पौधे की जड़ों को भिगोता है, फिर टंकी में लौट आता है। बॉक्स में न्यूट्रिएंट, बीज और कोको डिस्क मिलते हैं, तो पहली फ़सल तुरंत शुरू हो जाती है। ज़मीन पर यह सिर्फ़ एक गमले जितनी जगह लेता है।
छोटी बालकनी वालों के लिए यह सबसे समझदारी वाला विकल्प है, क्योंकि पौधे ऊपर की तरफ़ बढ़ते हैं और फ़र्श खाली रहता है। तेज़ हवा में टावर हिल सकता है, इसलिए दीवार के सहारे या कोने में रखना बेहतर है। पंप बंद हुआ तो ऊपर के पौधे पहले सूखते हैं, गर्मियों में इस पर नज़र रखनी पड़ती है। धूप कम से कम चार पाँच घंटे चाहिए।
Nova सीरीज़ का बीच वाला मॉडल, बीस पौधों की जगह के साथ। पंप नीचे की टंकी से पोषक पानी उठाकर टावर के ऊपरी सिरे तक पहुँचाता है और वह धीरे धीरे हर लेयर से गुज़रता है। सेट में बीज, TDS मीटर और कोको डिस्क आते हैं, यानी पानी की गुणवत्ता नापने का तरीका पहले दिन से हाथ में रहता है। लेटस, पालक, पुदीना और छोटी मिर्च तक इसमें उगाई जाती है।
परिवार के लिए हफ़्ते की सलाद की पत्तियाँ निकालने का इरादा हो तो यह ठीक साइज़ है। शुरुआत में कोकोपीट, बीज और पानी की जाँच का रूटीन बनाना पड़ता है, वरना ऊपरी लेयर के पौधे पीछे रह जाते हैं। मानसून में पत्तियों पर फंगस आने की शिकायत आम है, हवा का बहाव खुला रखें। टावर भरने पर वज़न अच्छा हो जाता है, जगह पहले तय कर लें।
छत्तीस पौधों वाला बड़ा टावर, जिसके साथ साठ लीटर की टंकी आती है। बड़ी टंकी का फ़ायदा सीधा है: पानी का तापमान और पोषक तत्वों का घनत्व जल्दी नहीं बदलता, इसलिए पौधों को झटका कम लगता है। पैकेज में बीज, TDS मीटर और कोको डिस्क शामिल हैं। सिस्टम एयरोपोनिक तरीके से काम करता है, जड़ों को पानी की फुहार और हवा दोनों मिलती रहती है।
यह छत या बड़े आँगन के लिए है, बालकनी में इसे रखना मुश्किल होगा। घर की सलाद और साग की अच्छी मात्रा निकल आती है, कुछ लोग इसे छोटे स्तर पर बेचने के लिए भी लेते हैं। साठ लीटर पानी बदलना अकेले आसान नहीं, महीने में एक बार यह काम प्लान करना पड़ता है। गर्मियों में टंकी को छाया में रखना ज़रूरी है, वरना पानी गरम होकर जड़ों को नुकसान पहुँचाता है।
चालीस पौधों वाला टावर, Nova रेंज का सबसे बड़ा घरेलू मॉडल। कई लेयर में नेट कप लगे होते हैं और पंप ऊपर तक पोषक पानी भेजता है, नीचे लौटकर वही पानी दोबारा इस्तेमाल होता है। बॉक्स में बीज, TDS मीटर और कोको डिस्क मिलते हैं। एक ही टावर से एक साथ कई तरह की पत्तेदार सब्ज़ी उगाई जा सकती है, हर लेयर पर अलग किस्म।
छत पर छोटा किचन फार्म बनाने का इरादा हो तो यह साइज़ काम का है। पड़ोसियों को बाँटने लायक़ पैदावार निकल आती है, बस देखभाल का समय रोज़ निकालना पड़ेगा। इतने पौधों के साथ पानी की जाँच, न्यूट्रिएंट की मात्रा और पंप की सफ़ाई ढीली नहीं छोड़ी जा सकती। घूमने जाने से पहले किसी को पानी और बिजली देखने के लिए कहना पड़ता है।
इक्कीस पॉड वाला स्मार्ट इनडोर सिस्टम, जिसे फ़ोन ऐप से चलाया जाता है। साढ़े सात लीटर की टंकी और ऑटो ड्रिप सिंचाई की वजह से यह कई दिन बिना छेड़े चलता रहता है, लाइट का शेड्यूल भी ऐप में सेट होता है। छत्तीस वाट की एलईडी रॉड ऊपर तक खिसकती है, इसलिए पौधे बड़े होने पर रोशनी की दूरी बदली जा सकती है। बॉडी स्टेनलेस स्टील की है, प्लास्टिक वाले सस्ते किट से यह अलग दिखता है।
जिनके पास धूप नहीं है और जो रोज़ का काम कम रखना चाहते हैं, उनके लिए यह सुविधाजनक है। कीमत भारतीय किट के मुक़ाबले काफ़ी ऊँची पड़ती है और पॉड्स, स्पंज जैसे कंज़्यूमेबल आयातित होते हैं, दोबारा खरीदना हर बार आसान नहीं। ऐप और वाई फ़ाई पर निर्भरता भी है, नेटवर्क गड़बड़ हो तो सेटिंग बदलने में झंझट होती है। सर्विस और स्पेयर पार्ट्स भारत में सीमित हैं।