केंट आरओ सिस्टम्स की नींव 1999 में नोएडा में डॉ. महेश गुप्ता ने रखी थी, जो आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। कंपनी ने आरओ के साथ यूवी, यूएफ और टीडीएस कंट्रोलर जोड़ने वाली तकनीक बनाई, जिससे खारे और नगरपालिका के पानी, दोनों पर एक ही मशीन चलने लगी। घरेलू नाम 2006 के बाद बना, जब हेमा मालिनी एंबेसडर बनीं। आज रेंज सिर्फ वॉटर प्यूरीफायर तक सीमित नहीं है: एयर प्यूरीफायर, वॉटर सॉफ्टनर, सब्जी और फल धोने वाले प्यूरीफायर, वैक्यूम क्लीनर, कोल्ड प्रेस जूसर और छोटे किचन उपकरण भी बनते हैं। उत्पादन रुड़की और ग्रेटर नोएडा के प्लांट में होता है।
जिन घरों में पानी सख्त है या टीडीएस ज्यादा, उनके लिए यह सबसे आसान रास्ता है, क्योंकि इंस्टॉलेशन और सालाना सर्विस का जाल पूरे देश में फैला है। खर्च का हिसाब पहले लगा लेना चाहिए: मशीन की कीमत के बाद फिल्टर और मेंब्रेन बदलना हर साल जेब पर असर डालता है। साफ म्युनिसिपल पानी वाले शहरों में पूरा आरओ जरूरी नहीं, वहां सस्ता यूवी मॉडल काफी है।
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