दिल्ली से 2014 में शुरू हुआ भारतीय मार्केटप्लेस, जिसका दावा छह लाख से ज़्यादा पंजीकृत फ्रीलांसरों का है। मॉडल मिला-जुला है: क्लाइंट प्रोजेक्ट पोस्ट करता है और तैयार सर्विस गिग भी खरीद सकता है। कमीशन सदस्यता योजना पर निर्भर करता है और आमतौर पर 8 से 10 प्रतिशत के दायरे में रहता है, यानी बड़े विदेशी मंचों से कम। प्रोफ़ाइल वेरिफ़िकेशन, सुरक्षित भुगतान और विवाद निपटान की व्यवस्था मौजूद है, और सपोर्ट भारतीय समय के हिसाब से चलता है।
कंटेंट राइटिंग, डेटा एंट्री, ग्राफ़िक डिज़ाइन और डिजिटल मार्केटिंग वालों के लिए यह अच्छा दूसरा चैनल है, खासकर तब जब रुपये में सीधा भुगतान चाहिए। बड़े और महँगे अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट यहाँ कम हैं, इसलिए इसे मुख्य आय का एकमात्र सहारा बनाना जोखिम भरा है।
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