काम के लिए रोज एक ही कुर्सी पर बैठना अब जरूरी नहीं रहा। किसी को एक दिन की डेस्क चाहिए, किसी को दो घंटे का मीटिंग रूम, किसी को टीम के लिए दस सीट का केबिन। ऐसे हर काम के लिए कोवर्किंग स्पेस बुकिंग प्लेटफॉर्म सबसे सीधा रास्ता है। यह सूची फ्रीलांसर, रिमोट कर्मचारी, छोटे स्टार्टअप और उन कंपनियों के लिए है, जो लंबी लीज और जमा राशि के झंझट में नहीं पड़ना चाहतीं।
चुनाव में सबसे पहले देखा गया कि प्लेटफॉर्म कितने शहरों में काम करता है और उसके नेटवर्क में कितने सेंटर हैं। इसके बाद कीमत: डे पास का रेट, मीटिंग रूम का प्रति घंटा किराया, ब्रोकरेज या छिपी फीस। तीसरी बात बुकिंग का तरीका। कहीं ऐप से सीट तुरंत कन्फर्म हो जाती है, कहीं टीम पहले कॉल करती है और फिर टूर कराती है। साथ में यह भी देखा कि वर्चुअल ऑफिस, मैनेज्ड ऑफिस और छोटे शहरों के विकल्प मिलते हैं या नहीं, और सपोर्ट कितनी जल्दी जवाब देता है।
नंबर संपादकीय मन से तय नहीं होते। क्रम कम्युनिटी के वोट से बनता है, इसलिए सूची समय के साथ बदलती रहती है। हर कार्ड में प्लस, माइनस और असली उपयोगकर्ताओं के रिव्यू पढ़ें, फिर अपने शहर और बजट के हिसाब से दो तीन प्लेटफॉर्म पर एक ही जगह का दाम मिलाकर देखें। अंतर अक्सर ठीक ठाक निकलता है।
myHQ की शुरुआत 2016 में दिल्ली एनसीआर से हुई और 2022 में इसे रियल एस्टेट कंसल्टेंसी ANAROCK ने खरीद लिया। ऐप और साइट पर देश भर के 1500 से ज्यादा कोवर्किंग स्पेस, वर्क कैफे, मीटिंग और कॉन्फ्रेंस रूम एक जगह मिलते हैं। डे पास करीब 200 रुपये से शुरू होता है, मीटिंग रूम लगभग 300 रुपये प्रति घंटा। WeWork, Awfis, Innov8, 91Springboard जैसे बड़े ब्रांड भी लिस्ट में हैं, साथ में वर्चुअल ऑफिस और जीएसटी रजिस्ट्रेशन वाला पता भी लिया जा सकता है।
जिसे एक दिन की डेस्क या तीन से बीस सीट का मीटिंग रूम तुरंत चाहिए, उसके लिए यह आसान विकल्प है। बुकिंग में साथी और मेहमान जोड़ने की सुविधा टीम वालों के काम आती है। पर दम मुख्य रूप से बड़े शहरों में है, छोटे कस्बों में विकल्प पतले पड़ जाते हैं। सस्ते और महंगे स्पेस एक ही सूची में दिखते हैं, इसलिए फोटो और रेट ध्यान से मिलाने पड़ते हैं।
चेन्नई से 2017 में शुरू हुआ GoFloaters पे पर यूज मॉडल पर चलता है, यानी जितना बैठे उतना पैसा। नेटवर्क में 2000 से ज्यादा वर्कस्पेस हैं और 35 से ज्यादा शहर, जिनमें टियर 2 और टियर 3 कस्बे भी शामिल हैं। हॉट डेस्क दिन के हिसाब से और मीटिंग रूम घंटे के हिसाब से बुक होते हैं। कंपनियों के लिए अलग उत्पाद WorqFlexi है, जिससे बिखरी हुई टीम अपने शहर में डेस्क खुद बुक कर लेती है। Business World ने इसे फ्लेक्सी स्पेस कैटेगरी में बेस्ट एग्रीगेटर कहा था।
जो अकेले काम करते हैं या पांच दस लोगों की टीम चलाते हैं, उनके लिए यह पैसे के हिसाब से सबसे हल्का पड़ता है। छोटे शहरों में कैफे और शेयर्ड ऑफिस भी मिल जाते हैं, जो दूसरी जगह कम दिखते हैं। कमी यह है कि कैफे वाली जगहों पर शोर और इंटरनेट की पक्की गारंटी नहीं होती, और बहुत बड़े मैनेज्ड ऑफिस के मामले में विकल्प सीमित हैं।
Qdesq 2015 में बना और आज इसके प्लेटफॉर्म पर 4500 से ज्यादा सेंटर लिस्टेड हैं, जो 120 से अधिक शहरों में फैले हैं। कंपनी के मुताबिक हर महीने करीब 65 हजार डेस्क बुक होती हैं और साल भर में 10 हजार से ज्यादा कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं। यहां कोवर्किंग डेस्क के अलावा वर्चुअल ऑफिस, प्राइवेट केबिन और पूरा मैनेज्ड ऑफिस भी लिया जा सकता है। जांची गई लिस्टिंग पर Q शील्ड बैज लगता है, जिससे भरोसे का अंदाजा मिलता है।
फोकस साफ तौर पर कंपनियों की तरफ है। जिसे तीस सीट का ऑफिस या दूसरे शहर में ब्रांच चाहिए, उसे यहां तुलना करने में सहूलियत होती है, टीम साइट विजिट भी कराती है। अकेले फ्रीलांसर के लिए यह थोड़ा भारी लगता है, क्योंकि कई जगह पहले पूछताछ फॉर्म भरना पड़ता है और सेल्स टीम का फोन आता है। एक दिन की डेस्क के लिए तुरंत ऑनलाइन कन्फर्मेशन हर सेंटर पर नहीं मिलता।
CoFynd गुरुग्राम से चलने वाला डिस्कवरी और बुकिंग प्लेटफॉर्म है। यहां कोवर्किंग स्पेस के साथ कोलिविंग और प्राइवेट ऑफिस भी एक ही जगह मिलते हैं, कवरेज बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, इंदौर, कोच्चि, जयपुर जैसे 18 से ज्यादा शहरों में है। हॉट डेस्क, डेडिकेटेड डेस्क, केबिन और मैनेज्ड ऑफिस, चारों तरह के विकल्प एक फिल्टर से छांटे जा सकते हैं। कंपनी ब्रोकरेज न लेने की बात कहती है और लिस्टिंग की जांच का दावा करती है।
जिसे रहने और काम करने, दोनों की जगह एक ही साइट पर देखनी है, उसके लिए यह सुविधा भरा है। शहर के हिसाब से लंबी सूची मिलती है, इसलिए दाम की तुलना अच्छी हो जाती है। दूसरी तरफ लिस्टिंग की गिनती इतनी बड़ी बताई जाती है कि हर पते की जानकारी ताजा नहीं रहती। ज्यादातर मामलों में बुकिंग सीधे नहीं होती, टीम कॉल करके आगे बढ़ाती है, इसलिए एक दिन की डेस्क वालों को इंतजार करना पड़ सकता है।
Stylework को 2016 में स्पर्श खंडेलवाल ने शुरू किया था, दफ्तर गुरुग्राम के सेक्टर 44 में है। प्लेटफॉर्म 3000 से ज्यादा जगहों और 90 से अधिक शहरों तक पहुंच का दावा करता है। खास चीज है FlexiDesk पास, जिससे एक ही मेंबरशिप पर अलग अलग शहरों के सेंटर में बैठा जा सकता है। इसके अलावा हॉट डेस्क, डेडिकेटेड डेस्क, प्राइवेट केबिन, मीटिंग और कॉन्फ्रेंस रूम सब ऐप से बुक होते हैं, बड़े ब्रांड जैसे WeWork और Awfis भी नेटवर्क में हैं।
जिन कंपनियों के लोग कई शहरों में बिखरे हैं, उनके लिए एक पास वाला मॉडल पैसे बचाता है। हाइब्रिड टीम के लिए बनी रिपोर्टिंग भी काम की चीज है। कमजोरी यह है कि एक दिन की बुकिंग के मामले में कई सेंटर पर कन्फर्मेशन में समय लगता है, और ऐप में उपलब्धता कभी कभी असल हालत से आगे पीछे दिखती है। छोटे शहरों की लिस्टिंग में जानकारी कम मिलती है।
Coworker 2015 में बना दुनिया भर का मार्केटप्लेस है, जिसमें 170 से ज्यादा देशों के करीब 19 हजार से अधिक कोवर्किंग स्पेस लिस्टेड हैं। भारत के हिस्से में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, गोवा जैसे शहरों के सैकड़ों सेंटर मिलते हैं, हर पेज पर सुविधाएं, वाईफाई स्पीड, डे, वीक और मंथ के रेट और उपयोगकर्ताओं की रेटिंग दी जाती है। कंपनियों के लिए Global Pass है, जिससे एक मेंबरशिप पर कई देशों के स्पेस में बैठा जा सकता है।
सबसे बड़ा फायदा रिव्यू का ढेर है। बुकिंग से पहले पढ़ लेने पर पता चल जाता है कि जगह की कुर्सी, इंटरनेट और शोर कैसा है। घुमक्कड़ रिमोट वर्कर और विदेश जाने वालों के लिए यह सही जगह है। पर यह भारतीय प्लेटफॉर्म नहीं है, साइट अंग्रेजी में है और रुपये में तुरंत ऑनलाइन पेमेंट हर सेंटर पर नहीं होता। कई मामलों में पूछताछ स्पेस को भेजी जाती है और जवाब का इंतजार करना पड़ता है।
Desklinq को 2023 में आदित्य बेलवाल ने बेंगलुरु में शुरू किया। जोर रियल टाइम बुकिंग पर है, यानी डेस्क या मीटिंग रूम उसी वक्त कन्फर्म, लीड भेजकर इंतजार नहीं। सर्च में एनएलपी वाली सुविधा है, जहां सीधे लिखा जा सकता है कि गुरुग्राम में पार्किंग वाला दस सीट का ऑफिस 50 हजार से कम में चाहिए, और नतीजे सामने आ जाते हैं। कोवर्किंग डेस्क के अलावा यहां जैम रूम, पॉडकास्ट और वीडियो स्टूडियो भी बुक होते हैं। ब्रोकरों के लिए अलग डैशबोर्ड और कमीशन का सिस्टम है।
यह नया और छोटा प्लेटफॉर्म है, इसलिए फायदा उसे है जो बेंगलुरु और दिल्ली एनसीआर में तेजी से जगह चाहता है। स्टूडियो और जैम रूम वाला हिस्सा क्रिएटर लोगों के लिए अलग से काम का है। कमी साफ है, नेटवर्क बड़े नामों जितना चौड़ा नहीं और कई शहरों में लिस्टिंग गिनी चुनी हैं। ऐप और साइट में कुछ जगह जानकारी अधूरी दिखती है।
FLEXO मुंबई से चलने वाला एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म है, जो कोवर्किंग, शेयर्ड और पूरे कमर्शियल ऑफिस, तीनों तरफ काम करता है। टीम कमर्शियल रियल एस्टेट की समझ के साथ जगह छांटती है और सही दाम पर सौदा कराने में मदद करती है, यानी यह सिर्फ लिस्टिंग साइट नहीं, बीच में इंसान भी बैठा है। स्पेस मालिक खुद अपनी जगह, रेट और सुविधाएं डाल सकते हैं और लीड लेते हैं। एक अलग बात, लंबी अवधि वाली हर बुक की गई डेस्क पर कंपनी एक पेड़ लगाने का वादा करती है।
जिसे छह महीने या साल भर के लिए ऑफिस चाहिए और मोलभाव में मदद चाहिए, उसके लिए यह ठीक बैठता है। मुंबई, बेंगलुरु और पुणे में विकल्प सबसे अच्छे हैं। एक दिन के डे पास वालों के लिए यह बना नहीं है, यहां ऑनलाइन तुरंत सीट पक्की करने का रास्ता नहीं है। संपर्क के बाद ही रेट और उपलब्धता की पूरी बात खुलती है।
HuntOffices दिल्ली एनसीआर से शुरू हुआ एग्रीगेटर है और इसका दम दिल्ली, गुरुग्राम तथा नोएडा में सबसे ज्यादा है। साइट पर कंपनी 10 हजार से ज्यादा वर्कस्पेस और 312 से अधिक कोवर्किंग लोकेशन तक पहुंच की बात कहती है, साथ में मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और पुणे की भी लिस्टिंग हैं। कोवर्किंग डेस्क के अलावा सर्विस्ड ऑफिस, मीटिंग रूम और वर्चुअल ऑफिस यहां से लिए जा सकते हैं। खाता बनाकर विशलिस्ट बनाई जा सकती है और कॉल बुक की जा सकती है।
खास बात ऑफलाइन मदद है, टीम जगह दिखाने साथ चलती है और मोलभाव में हाथ बंटाती है। एनसीआर में दफ्तर ढूंढने वाले छोटे कारोबारी इसका फायदा उठा सकते हैं। दूसरी तरफ ब्रांड छोटा है, ऐप नहीं है और साइट का डिजाइन पुराने ढंग का लगता है। एनसीआर से बाहर विकल्प पतले हैं और कुछ लिस्टिंग में रेट लिखा ही नहीं होता।
Coworkingers को 2020 में अंकुर अग्रवाल ने दिल्ली से शुरू किया। यह सीधी सादी लिस्टिंग साइट है, जिस पर भारत के 21 से ज्यादा शहरों के कोवर्किंग स्पेस, मीटिंग रूम और कॉन्फ्रेंस रूम मिलते हैं, दिल्ली, मुंबई, पुणे और चेन्नई में सबसे ज्यादा। हर पेज पर एयर कंडीशन, वाईफाई, प्रिंटर, पार्किंग जैसी सुविधाओं की चेकलिस्ट, नक्शा और पता दिया रहता है। स्पेस मालिकों के लिए लिस्टिंग मुफ्त है और कंपनी ब्रोकरेज न लेने की बात कहती है।
जो ब्राउज करके खुद सेंटर चुनना चाहता है और सीधे मालिक से बात करने में परहेज नहीं करता, उसके लिए यह हल्का और तेज विकल्प है। पूछताछ व्हाट्सऐप और फोन से भी होती है। पर यहां ऑनलाइन पेमेंट और तुरंत सीट कन्फर्म करने का सिस्टम नहीं है, रिव्यू भी बहुत कम हैं। नेटवर्क बड़े प्लेटफॉर्म के मुकाबले छोटा है, इसलिए दाम की तुलना अधूरी रह जाती है।