भारत के प्लेनेटेरियम उन लोगों के लिए हैं जिन्हें आकाश देखना अच्छा लगता है, पर शहर की रोशनी में तारे दिखते नहीं। यह रेटिंग उन्हीं गुंबदों की सूची है, जहाँ छत पर पूरा आसमान चलता है। बच्चों के साथ छुट्टी का प्लान बनाना हो, स्कूल की ट्रिप तय करनी हो या खुद खगोल विज्ञान में दिलचस्पी हो, यहाँ से चुनना आसान हो जाता है।
चुनते समय कुछ चीजें गिनी गईं: गुंबद का आकार और बैठने की जगह, प्रोजेक्शन की तकनीक, यानी शो डिजिटल है या पुराने ऑप्टो मैकेनिकल तारा प्रोजेक्टर पर, 3D सुविधा है या नहीं। इसके बाद शो की भाषाएँ और अवधि, टिकट की कीमत, ऑनलाइन बुकिंग, स्कूल समूहों की छूट, बंद रहने का दिन। साथ में विज्ञान गैलरी, साइंस पार्क या टेलीस्कोप सत्र हों तो एक ही टिकट में दिन भर का काम निकल जाता है। हर जगह के आधिकारिक पेज और खुले स्रोतों से जानकारी मिलाई गई है, क्योंकि शो का समय अक्सर बदलता है।
क्रम संपादकों ने तय नहीं किया। स्थान समुदाय के वोट से बनते हैं, इसलिए ऊपर वही रहता है जिसे लोग सच में पसंद करते हैं। कार्ड में प्लस, माइनस और नीचे लिखे रिव्यू ध्यान से पढ़ें: कहीं गुंबद बड़ा है पर टिकट काउंटर पर लाइन लंबी, कहीं शो छोटा पर सस्ता। जाने से पहले फोन करके समय की पुष्टि कर लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
1963 में खुला यह तारामंडल कोलकाता के 96 जवाहरलाल नेहरू रोड पर खड़ा है और इसका गोल ढाँचा साँची के स्तूप की तरह दिखता है। उद्घाटन जवाहरलाल नेहरू ने किया था। गुंबद का व्यास करीब 23 मीटर है, इसे एशिया का सबसे बड़ा तारामंडल माना जाता है और बैठने की जगह भी बड़ी है। पुराने ऑप्टो मैकेनिकल तारा प्रोजेक्टर के साथ अब डिजिटल फुलडोम सिस्टम चलता है। शो बंगाली, हिंदी और अंग्रेजी में होते हैं, यानी भाषा की दिक्कत कम है।
परिवार और स्कूल समूहों के लिए सीधा विकल्प, क्योंकि विक्टोरिया मेमोरियल और सेंट पॉल कैथेड्रल पास ही हैं और एक दिन में तीनों घूम सकते हैं। छुट्टियों और शनिवार को टिकट काउंटर पर भीड़ रहती है, इसलिए शो शुरू होने से आधा घंटा पहले पहुँचना ठीक रहता है। अंदर बहुत ठंडा रहता है, हल्की जैकेट काम आती है। जो लोग नई पीढ़ी के 3D शो खोज रहे हैं, उन्हें यहाँ का अनुभव कुछ पुराना लग सकता है।
96 जवाहरलाल नेहरू रोड, कोलकाता 700071, पश्चिम बंगाल
तीन मूर्ति भवन के हरे परिसर में बना यह तारामंडल प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय के अंतर्गत आता है, यानी नेहरू के पुराने सरकारी आवास के ठीक बगल में। इमारत 1984 में जनता के लिए खुली और बाद में बड़ी मरम्मत के बाद फिर शुरू हुई। यहाँ ऑप्टिकल स्टार प्रोजेक्टर के साथ 2D और 3D दोनों तरह के शो चलते हैं, हिंदी और अंग्रेजी में अलग समय पर। बच्चों का टिकट वयस्क से सस्ता है और स्कूल के छात्रों के लिए दर और भी कम रहती है।
दिल्ली में स्कूल ट्रिप का सबसे आम ठिकाना यही है, मेट्रो से पहुँचना भी सरल है। सोमवार को बंद रहता है, इसलिए हफ्ते के बीच में जाना बेहतर। गुंबद बहुत बड़ा नहीं है और सीटें सीमित हैं, छुट्टियों में शो हाउसफुल हो जाते हैं। परिसर में तारों को देखने के आयोजन और व्याख्यान भी होते हैं, पर उनकी सूचना अक्सर सोशल मीडिया पर ही आती है, इसलिए पेज पर नजर रखनी पड़ती है।
तीन मूर्ति भवन, तीन मूर्ति मार्ग, नई दिल्ली 110011
वर्ली के नेहरू सेंटर की गोल इमारत में बना मुंबई का तारामंडल शहर के खगोल प्रेमियों का पुराना अड्डा है। शो हिंदी, अंग्रेजी और मराठी में होते हैं, टिकट ऑनलाइन बुक हो जाता है और सीट चुनने का विकल्प भी मिलता है, हालाँकि हॉल में सीट बदल भी सकती है। संस्था खुद बताती है कि गुंबद के अंदर तापमान 20 डिग्री से कुछ कम रहता है। स्कूल और समूह छूट के लिए संस्थान के लेटरहेड पर पत्र देना जरूरी है, यह नियम सख्ती से चलता है।
आकाश दर्शन, कार्यशालाएँ और शौकिया खगोलविदों की बैठकें यहाँ नियमित होती हैं, इसलिए सिर्फ एक शो देखकर लौटने वाली जगह नहीं है। सोमवार बंद रहता है। पार्किंग वर्ली में हमेशा तंग रहती है, टैक्सी या बस से जाना आसान पड़ता है। रिफंड के मामले छह कार्य दिवस में निपटते हैं, यानी टिकट रद्द करने पर पैसा तुरंत नहीं मिलता।
नेहरू सेंटर, डॉ. एनी बेसेंट रोड, वर्ली, मुंबई 400018
बेंगलुरु का जवाहरलाल नेहरू तारामंडल 1989 में शुरू हुआ और 1992 से इसे बैंगलोर एसोसिएशन फॉर साइंस एजुकेशन चलाती है। हाई ग्राउंड्स में टी. चौडैया रोड पर परिसर काफी बड़ा है: गुंबद वाला स्काई थिएटर, इंटरैक्टिव प्रदर्शनी हॉल, साइंस पार्क और हर महीने चलने वाला अंतरिक्ष फिल्म कार्यक्रम। बच्चों के लिए विज्ञान क्लब, कार्यशालाएँ और विज्ञान शिक्षकों के लिए सत्र भी होते हैं। टिकट सस्ता है, लेकिन एक टिकट एक ही शो के लिए मान्य होता है।
जिन्हें एक बार का शो नहीं, बल्कि लगातार सीखने वाला ठिकाना चाहिए, उनके लिए यह सूची में सबसे उपयोगी जगह है: यहाँ छात्रों के लिए नियमित प्रोजेक्ट और खगोल प्रतियोगिताएँ चलती हैं। स्कूल पूरे थिएटर की बुकिंग भी कर सकते हैं। सोमवार बंद रहता है। परिसर के अंदर खाने की व्यवस्था सीमित है और वीकेंड पर काउंटर की लाइन लंबी हो जाती है।
श्री टी. चौडैया रोड, हाई ग्राउंड्स, बेंगलुरु 560001
नौबत पहाड़ की चढ़ाई पर बना बी. एम. बिड़ला तारामंडल 1985 में शुरू हुआ। इसके बाद 1990 में विज्ञान संग्रहालय जुड़ा और 2000 में डायनोसोरियम, जहाँ आंध्र क्षेत्र में मिले जीवाश्म और असली डायनासोर कंकाल रखा है। परिसर में कला दीर्घा और अंतरिक्ष संग्रहालय भी है। टिकट अलग अलग और कॉम्बो, दोनों रूप में मिलते हैं: सिर्फ शो, शो के साथ संग्रहालय, या सब कुछ मिलाकर। यह जगह देर शाम तक खुली रहती है, जो भारत में कम तारामंडलों में देखने को मिलता है।
एक ही टिकट में बच्चों को कई घंटे बिताने लायक चीजें मिल जाती हैं, इसलिए परिवारों के लिए फायदे का सौदा है। शो अंग्रेजी और स्थानीय भाषाओं में तय समय पर चलते हैं, इसलिए पहुँचकर पहले शो का समय पूछ लेना चाहिए। सीटें भर जाने पर अगला शो देखने के लिए इंतजार करना पड़ता है। हुसैन सागर के पास होने से आसपास ट्रैफिक भारी रहता है और पार्किंग से गुंबद तक ढलान चढ़नी पड़ती है।
नौबत पहाड़, आदर्श नगर, हैदराबाद 500463, तेलंगाना
पटना का इंदिरा गांधी तारामंडल 20 जुलाई 1989 को खुला और अदालतगंज के इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर में है। बिहार में इसे सब तारामंडल कहते हैं और यह राज्य के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन चलता है। बड़े गुंबद और बड़ी बैठक क्षमता के कारण इसे देश के सबसे बड़े तारामंडलों में गिना जाता है। बड़ी मरम्मत के बाद यहाँ नई डिजिटल प्रोजेक्शन प्रणाली लगी, शो 3D में चलते हैं और टिकट ऑनलाइन बुक करने की सुविधा जोड़ी गई है।
शो मुख्य रूप से हिंदी में होते हैं, इसलिए स्कूल के बच्चों को समझने में दिक्कत नहीं आती। गांधी मैदान से दूरी कम है, शहर के अंदर से पहुँचना सरल है। भीड़ के दिनों में एक शो के टिकट जल्दी खत्म हो जाते हैं, ऑनलाइन बुकिंग पहले कर लेना समझदारी है। परिसर में प्रदर्शनी हिस्सा सीमित है, यहाँ मुख्य आकर्षण गुंबद का शो ही है।
इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर, अदालतगंज, पटना 800001, बिहार
गोमती किनारे सूरजकुंड पार्क में बनी यह इमारत शनि ग्रह की तरह दिखती है, चारों ओर पाँच छल्ले लगे हैं। गुंबद का व्यास करीब 21 मीटर है। दो साल की मरम्मत के बाद तारामंडल फिर खुला और यहाँ सक्रिय स्टीरियो 3D प्रणाली लगी, जिसका दावा है कि यह देश में पहली है। आम दर्शक के लिए 2D शो का टिकट करीब 100 रुपये और 3D का करीब 200 रुपये रखा गया है, छात्रों तथा दिव्यांग दर्शकों को आधा दाम। संचालन उत्तर प्रदेश विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद करती है।
शो हिंदी में होते हैं, शनिवार और रविवार का पहला शो अंग्रेजी में रहता है। 30 या ज्यादा लोगों के समूह के लिए सुबह के अतिरिक्त शो की व्यवस्था हो जाती है। सोमवार बंद रहता है। दिव्यांग दर्शकों के लिए रैंप और लिफ्ट है। लखनऊ में यह पहला विकल्प है, पर बाकी सूची के मुकाबले टिकट महँगा पड़ता है और छोटे बच्चों को 3D चश्मा असहज लगता है।
सूरजकुंड पार्क, गोमती नदी के किनारे, लखनऊ, उत्तर प्रदेश
तिरुवनंतपुरम का प्रियदर्शिनी तारामंडल केरल राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संग्रहालय परिसर का हिस्सा है, जो 1984 में बना। इसका गुंबद झुका हुआ है और यह भारत का पहला हाइब्रिड तारामंडल कहा जाता है: GM-11 तारा प्रोजेक्टर के साथ डिजिटल प्रक्षेपण चलता है, इसलिए एक ही शो में तारों का आकाश और नई तस्वीरें दोनों दिख जाती हैं। लाइव खगोल कक्षाएँ भी होती हैं, यानी संचालक मौके पर सवालों के जवाब देता है।
एक ही टिकट के आसपास संग्रहालय की बिजली, इलेक्ट्रॉनिक्स, गणित और ऊर्जा गैलरी तथा साइंस पार्क मिल जाते हैं, कुल 300 से ज्यादा प्रदर्श। कभी कभी टेलीस्कोप सत्र और कार्यशालाएँ रखी जाती हैं। परिसर पीएमजी जंक्शन के पास है, शहर के अंदर से पहुँचना आसान। सोमवार बंद रहता है। शो मलयालम और अंग्रेजी में मुख्य रूप से होते हैं, हिंदी शो की गारंटी नहीं, बाहर से आने वालों को यह पहले पूछ लेना चाहिए।
विकास भवन पी.ओ., पीएमजी जंक्शन, तिरुवनंतपुरम 695033, केरल
planetariumguwahati.assam.gov.in
पूर्वोत्तर भारत का पहला बड़ा तारामंडल, 1994 से एम. जी. रोड पर चल रहा है और असम सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आता है। गुंबद वाले हॉल में जापानी गोटो GX प्रोजेक्टर से तारों का आकाश दिखाया जाता है, एक शो में 141 दर्शक बैठते हैं। शो असमिया और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में होते हैं, दिन में कई बार। सामान्य टिकट ₹50 का है, छात्रों को संस्थान के प्रमुख का पत्र दिखाने पर ₹30 में रियायती टिकट मिलता है। हर महीने की 15 तारीख को रखरखाव के लिए तारामंडल बंद रहता है।
परिसर में 3D थिएटर और ओकुलस उपकरणों वाला वीआर ज़ोन भी जोड़ा गया है, और साफ़ आसमान रहने पर शाम 6 से 7 बजे तक टेलीस्कोप से आकाश दर्शन कराया जाता है। जगह शहर के बीच है, गुवाहाटी उच्च न्यायालय से लगी और लताशिल खेल मैदान के सामने, रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर के भीतर। कमज़ोरी एक ही है: टिकट शो से पंद्रह मिनट पहले काउंटर पर बँटते हैं, ऑनलाइन बुकिंग नहीं, तो छुट्टियों में सीटें जल्दी भर जाती हैं।
एम. जी. रोड, उज़ान बाज़ार, गुवाहाटी 781001, असम