स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने 1963 में मुंगेर में इसकी स्थापना की और गंगा दर्शन परिसर से चलने वाली इस धारा को सत्यानंद योग कहा जाता है। योग निद्रा, अंतर मौन और प्राणायाम की जो पद्धतियाँ आज देश भर के स्टूडियो में पढ़ाई जाती हैं, उनका व्यवस्थित रूप यहीं तैयार हुआ। पाठ्यक्रम आवासीय होते हैं, अवधि कुछ दिनों से लेकर महीनों तक जाती है, और योग पब्लिकेशन्स ट्रस्ट की किताबें पढ़ाई का आधार बनती हैं।
यह घूमने वाला रिट्रीट नहीं है: प्रवेश आवेदन स्वीकार होने पर मिलता है, परिसर में सादा शाकाहारी भोजन, तय दिनचर्या, सेवा कार्य और मोबाइल पर पाबंदी जैसी शर्तें रहती हैं। नए अभ्यासी घर पर किताबों और नज़दीकी सत्यानंद केंद्र से शुरुआत करें, फिर मुंगेर का रुख़ करें। पटना से सड़क या ट्रेन से चार से पाँच घंटे लगते हैं।
पता: गंगा दर्शन, मुंगेर, बिहार 811201
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