योग स्टूडियो चुनना जिम चुनने से अलग काम है: यहाँ शिक्षक की समझ, कक्षा का आकार और अभ्यास की परंपरा उपकरणों से ज़्यादा मायने रखती है। यह सूची उन लोगों के लिए है जो पीठ दर्द, नींद, तनाव या बस एक टिकाऊ दिनचर्या के लिए अभ्यास शुरू करना चाहते हैं, और उन अभ्यासियों के लिए भी जो शिक्षक प्रशिक्षण या योग चिकित्सा में गहराई तक जाना चाहते हैं।
चुनाव करते समय कुछ बातें देखी गईं: संस्थान कितने समय से पढ़ा रहा है, शिक्षक कहाँ से प्रशिक्षित हैं, कक्षा का ढाँचा तय रहता है या रोज़ बदलता है, शुरुआती लोगों के लिए अलग बैच है या नहीं, और चोट या बीमारी में अलग सलाह मिलती है या सबको एक जैसा क्रम थमा दिया जाता है। फीस, कक्षाओं का समय, आवासीय शिविरों की शर्तें और परिसर तक पहुँचना कितना व्यावहारिक है, इन पर भी ध्यान गया। सूची में मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, पुणे, बेंगलुरु और मैसूर से लेकर लोनावला तथा मुंगेर तक के केंद्र हैं, ताकि शहर की रोज़मर्रा कक्षाएँ और लंबी परंपरा वाले संस्थान, दोनों विकल्प सामने रहें।
क्रम संपादकीय राय से तय नहीं होता: कौन ऊपर रहेगा, यह पाठकों के वोट तय करते हैं, इसलिए स्थान समय के साथ बदलते रहते हैं। हर कार्ड में प्लस, माइनस और लोगों के अनुभव पढ़ें, उसके बाद एक ट्रायल कक्षा लेकर ख़ुद परखें। जिस योग स्टूडियो में सवाल पूछने की जगह हो और शिक्षक आपकी सीमा समझे, वही लंबे समय तक साथ चलता है। अपना अनुभव जोड़ें, वोट और समीक्षा से यह सूची और काम की होती जाएगी।
मुंबई के सांताक्रूज़ में 1918 में श्री योगेंद्र ने यह संस्थान शुरू किया था और इसे दुनिया का सबसे पुराना संगठित योग केंद्र माना जाता है। यहाँ आसन अकेले नहीं चलते: आहार, दिनचर्या, प्राणायाम और गृहस्थ जीवन में योग उतारने पर बराबर ज़ोर रहता है। सुबह की कक्षाएँ छह बजे के आसपास शुरू हो जाती हैं, साथ में सात दिन के आवासीय शिविर, स्वास्थ्य से जुड़े विशेष सत्र और शिक्षक प्रशिक्षण के छोटे तथा लंबे, दोनों प्रारूप चलते हैं।
यह जगह उन लोगों के लिए है जो योग को व्यायाम से आगे, जीवनशैली की तरह सीखना चाहते हैं; परिवार के साथ आने वालों को भी सादगी भरा माहौल रास आता है। जिन्हें चमकदार स्टूडियो, संगीत वाली फ्लो क्लास या देर शाम के लचीले स्लॉट चाहिए, उन्हें अनुशासन सख़्त लगेगा। लोकप्रिय शिविरों का पंजीकरण पहले भर जाता है, इसलिए तारीख़ महीने भर पहले पूछ लेना ठीक रहता है।
श्री योगेंद्र मार्ग, प्रभात कॉलोनी, सांताक्रूज़ पूर्व, मुंबई 400055
कैलाश कॉलोनी का यह केंद्र स्वामी विष्णुदेवानंद की अंतरराष्ट्रीय शिवानंद योग वेदांत परंपरा का हिस्सा है। हर कक्षा का ढाँचा तय रहता है: प्रारंभिक विश्रांति, कपालभाति और अनुलोम विलोम, सूर्य नमस्कार, बारह मूल आसन और अंत में गहरी शिथिलता। शुरुआती लोगों के लिए अलग कोर्स, नियमित ओपन क्लास, सत्संग, कीर्तन और वेदांत पर व्याख्यान चलते रहते हैं, जबकि पूरा शिक्षक प्रशिक्षण मुख्य रूप से केरल के नेय्यार डैम आश्रम में होता है।
जिन्हें एक ही क्रम को महीनों दोहराकर गहराई में जाना पसंद है, उनके लिए यह उपयुक्त है। जो हर हफ़्ते नई शैली, गरम कमरा या फिटनेस केंद्रित सत्र खोजते हैं, उन्हें दोहराव उबाऊ लग सकता है। कक्षाएँ आध्यात्मिक पक्ष से जुड़ी रहती हैं और मंत्रोच्चार भी शामिल होता है, इसलिए पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष कसरत की तलाश हो तो यह पहले से जान लें।
A-41, कैलाश कॉलोनी, नई दिल्ली 110048
1924 में स्वामी कुवलयानंद ने लोनावला में यह संस्थान बनाया और तब से यहाँ योग को शोध की कसौटी पर परखा जाता है। शोध पत्रिका "योग मीमांसा" इसी परिसर से निकलती है, साथ में योगिक अस्पताल, आहार और क्रिया पर आधारित उपचार तथा कॉलेज के डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चलते हैं। आवासीय स्वास्थ्य शिविर सात दिन से लेकर कई हफ़्तों तक के होते हैं, जिनमें चिकित्सकीय जाँच और व्यक्तिगत अभ्यास तालिका शामिल रहती है। मुंबई और दिल्ली में भी केंद्र हैं।
पीठ दर्द, रक्तचाप, मधुमेह या लंबे तनाव में योग का सहारा ढूँढ रहे लोगों के लिए यह ठीक बैठता है, क्योंकि अभ्यास डॉक्टर की राय के साथ चलता है। पुणे से लगभग डेढ़ घंटा और मुंबई से ढाई घंटा लगता है, इसलिए रोज़ आना-जाना व्यावहारिक नहीं। परिसर की दिनचर्या सुबह जल्दी शुरू होती है और सुविधाएँ आरामदेह रिज़ॉर्ट जैसी नहीं, सादी हैं।
स्वामी कुवलयानंद मार्ग, लोनावला, महाराष्ट्र 410403
1976 में टी.के.वी. देसिकाचार ने चेन्नई के मंदावेली में यह संस्थान शुरू किया और यहाँ का तरीक़ा व्यक्ति पर केंद्रित है: अभ्यास व्यक्ति के अनुसार ढलता है, व्यक्ति अभ्यास के अनुसार नहीं। पहली मुलाक़ात में विस्तृत परामर्श होता है, उसके बाद हर अभ्यासी को अपना क्रम मिलता है और नियमित फ़ॉलो-अप चलता है। समूह कक्षाओं के अलावा योग चिकित्सा, गर्भावस्था, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग कार्यक्रम, तथा योग सूत्र और संस्कृत पर कक्षाएँ मिलती हैं।
व्यक्तिगत ध्यान का दाम भी होता है: एक-पर-एक सत्र समूह कक्षा से महँगे पड़ते हैं और समय पहले से तय करना ज़रूरी है। जिन्हें पसीना बहाने वाली तेज़ क्लास चाहिए, उन्हें गति धीमी लगेगी। पुरानी चोट, साँस की तकलीफ़ या नींद की गड़बड़ी वाले लोगों के लिए यही धीमापन असल फ़ायदा साबित होता है।
नंबर 31, चौथी क्रॉस स्ट्रीट, आर.के. नगर, मंदावेली, चेन्नई 600028
बी.के.एस. आयंगर ने 1975 में पुणे में इसकी शुरुआत की और आज दुनिया भर की आयंगर योग शिक्षा की जड़ यही संस्थान है। बेल्ट, ब्लॉक, कुर्सी, रस्सियाँ और बोल्स्टर का इस्तेमाल इस पद्धति की पहचान है: शरीर को सहारा देकर आसन में सही संरेखण सिखाया जाता है, जिससे मुद्रा देर तक बनी रहती है। कक्षाएँ स्तरों में बँटी हैं, अलग से चिकित्सकीय कक्षा चलती है और प्रमाणित शिक्षकों के लिए विशेष सत्र होते हैं।
दाख़िला आसान नहीं: आवेदन महीनों पहले भेजना पड़ता है, पहले से कुछ महीनों का नियमित अभ्यास अपेक्षित है और प्रतीक्षा सूची लंबी रहती है। जो बारीक निर्देश और सीधी टोकाटाकी सुनने को तैयार हैं, उन्हें बदले में बहुत मिलता है। संगीत के साथ बहती आरामदेह कक्षा ढूँढने वालों के लिए यह जगह नहीं, यहाँ हर आसन पर मेहनत होती है।
1107 बी/1, हरे कृष्ण मंदिर रोड, मॉडल कॉलोनी, पुणे
स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने 1963 में मुंगेर में इसकी स्थापना की और गंगा दर्शन परिसर से चलने वाली इस धारा को सत्यानंद योग कहा जाता है। योग निद्रा, अंतर मौन और प्राणायाम की जो पद्धतियाँ आज देश भर के स्टूडियो में पढ़ाई जाती हैं, उनका व्यवस्थित रूप यहीं तैयार हुआ। पाठ्यक्रम आवासीय होते हैं, अवधि कुछ दिनों से लेकर महीनों तक जाती है, और योग पब्लिकेशन्स ट्रस्ट की किताबें पढ़ाई का आधार बनती हैं।
यह घूमने वाला रिट्रीट नहीं है: प्रवेश आवेदन स्वीकार होने पर मिलता है, परिसर में सादा शाकाहारी भोजन, तय दिनचर्या, सेवा कार्य और मोबाइल पर पाबंदी जैसी शर्तें रहती हैं। नए अभ्यासी घर पर किताबों और नज़दीकी सत्यानंद केंद्र से शुरुआत करें, फिर मुंगेर का रुख़ करें। पटना से सड़क या ट्रेन से चार से पाँच घंटे लगते हैं।
गंगा दर्शन, मुंगेर, बिहार 811201
कोयंबटूर के पास वेल्लियंगिरि पहाड़ियों की तलहटी में सद्गुरु का यह परिसर योग कक्षा से बड़ा ठिकाना है: ध्यानलिंग, आदियोगी की प्रतिमा और आयुर्वेद केंद्र भी यहीं हैं। ईशा हठ योग स्कूल में अंग मर्दन, सूर्य क्रिया, योगासन और भूत शुद्धि जैसे कार्यक्रम अलग-अलग सिखाए जाते हैं, और शिक्षक प्रशिक्षण कई महीनों का आवासीय कोर्स है। इनर इंजीनियरिंग तथा परिचयात्मक सत्र दर्जनों शहरों और ऑनलाइन भी चलते हैं, इसलिए शुरुआत घर से हो सकती है।
एक साथ बहुत लोग सीखते हैं, इसलिए व्यक्तिगत सुधार पर ध्यान सीमित रहता है। कार्यक्रम के बाद घर पर रोज़ साधना की अपेक्षा रहती है, हफ़्ते में दो बार वाला रवैया यहाँ नहीं चलेगा। भीड़, आध्यात्मिक ढाँचा और संस्था से जुड़ी सार्वजनिक बहस असहज लगे तो पहले कोई छोटा सत्र आज़माना बेहतर है।
वेल्लियंगिरि पहाड़ियों की तलहटी, इक्कराई बोलुवमपत्ती, कोयंबटूर 641114
बेंगलुरु के सदाशिवनगर से चलने वाला यह केंद्र पावर योग और पारंपरिक हठ अभ्यास साथ पढ़ाने के लिए जाना जाता है। कक्षाओं की गति तेज़ रहती है: सूर्य नमस्कार के कई चक्र, ताक़त और लचीलेपन पर काम, बीच-बीच में प्राणायाम तथा ध्यान। 200 और 300 घंटे के शिक्षक प्रशिक्षण, वज़न घटाने पर केंद्रित कार्यक्रम, कॉर्पोरेट सत्र और ऑनलाइन बैच भी चलते हैं, जिससे दूसरे शहरों के लोग भी जुड़ पाते हैं।
जो योग से फिटनेस चाहते हैं और पसीना बहाने से गुरेज़ नहीं करते, उन्हें यह शैली रास आएगी। घुटने या कंधे की ताज़ा चोट, अधिक वज़न या पहला अनुभव हो तो शुरुआत धीमी कक्षा से करें और शिक्षक को स्थिति पहले ही बता दें। ब्रांड का प्रचार तेज़ है, इसलिए बैच का आकार तथा शिक्षक का नाम पूछकर एक ट्रायल कक्षा लेना समझदारी है।
13वीं क्रॉस, सदाशिवनगर, बेंगलुरु
आयाना योग अकादमी बेंगलुरु में जयनगर सहित कई इलाक़ों में स्टूडियो चलाती है और शैलियों की सूची लंबी रखती है: हठ, विन्यास, यिन, एरियल योग, योग निद्रा, प्रसव पूर्व अभ्यास और बच्चों की कक्षाएँ। बैच छोटे रहते हैं, सुबह तथा शाम के कई स्लॉट होते हैं, और मासिक सदस्यता के साथ ड्रॉप-इन कक्षा का विकल्प भी मिलता है। 200 घंटे का शिक्षक प्रशिक्षण और छोटी कार्यशालाएँ नियमित होती रहती हैं।
नौकरी के साथ अभ्यास का समय निकालने वालों के लिए लचीला शेड्यूल सबसे बड़ा फ़ायदा है, और एरियल जैसी कक्षाएँ कुछ नया आज़माने का मौक़ा देती हैं। शास्त्र आधारित गहराई या योग चिकित्सा की तलाश हो तो पुराने संस्थान बेहतर बैठते हैं। शिक्षक बदलते रहते हैं, इसलिए जिनकी शैली पसंद आए, उनका शेड्यूल पूछकर बुकिंग करना ठीक रहता है।
40वीं क्रॉस, नौवीं मेन रोड, पाँचवाँ ब्लॉक जयनगर, बेंगलुरु 560041
मैसूर के गोकुलम में आचार्य भरत शेट्टी की यह शाला अष्टांग विन्यास, हठ और चिकित्सकीय योग, तीनों पढ़ाती है। सुबह की कक्षाएँ जल्दी शुरू होती हैं, समूह छोटे रहते हैं और अभ्यास हर व्यक्ति की क्षमता देखकर तय होता है, इसलिए यहाँ आने वाले छात्र आम तौर पर एक महीने या उससे लंबे कोर्स में दाख़िला लेते हैं। 200 और 300 घंटे के शिक्षक प्रशिक्षण के साथ ध्यान, प्राणायाम तथा शास्त्र कक्षाएँ पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं।
मैसूर में कुछ हफ़्ते रुककर अभ्यास करने की योजना हो तो यह जगह ठीक बैठती है; शहर में शाकाहारी भोजन और किफ़ायती ठहराव आसानी से मिल जाता है। हफ़्ते में एक दो बार आने वाले शौकिया अभ्यासी के लिए इतनी लय बनाना मुश्किल है। कक्षाओं में जगह सीमित रहती है, ख़ासकर अक्टूबर से मार्च के मौसम में, इसलिए पंजीकरण पहले करना पड़ता है।
गोकुलम, मैसूर, कर्नाटक