गिग मॉडल का जनक: 2010 में शुरू हुआ इज़रायली मार्केटप्लेस, जहाँ फ्रीलांसर बीड नहीं करता, बल्कि तैयार सेवा पैकेज सजाकर रखता है और खरीदार सीधे ऑर्डर देता है। लोगो, वॉइस ओवर, वीडियो एडिटिंग, अनुवाद से लेकर AI प्रॉम्प्ट तक सैकड़ों श्रेणियाँ हैं। कमाई पर सपाट 20 प्रतिशत कमीशन लगता है, टिप और एक्स्ट्रा पर भी, यानी 100 डॉलर के ऑर्डर में 80 डॉलर हाथ आते हैं। सेलर लेवल बढ़ने पर प्रोमोटेड गिग और Fiverr Pro जैसी सुविधाएँ खुलती हैं।
जिनके पास पैकेज में बाँधी जा सकने वाली दोहराई सेवा है, उनके लिए यह मशीन की तरह काम करता है: प्रस्ताव लिखने में समय नहीं जाता। सलाहकारी या रणनीति जैसे लचीले कामों में यह मॉडल अटकता है, और गिग की रैंकिंग गिरते ही ऑर्डर सूख जाते हैं, इसलिए यहाँ की कमाई स्थिर से ज़्यादा लहरदार होती है।
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