1924 में स्वामी कुवलयानंद ने लोनावला में यह संस्थान बनाया और तब से यहाँ योग को शोध की कसौटी पर परखा जाता है। शोध पत्रिका "योग मीमांसा" इसी परिसर से निकलती है, साथ में योगिक अस्पताल, आहार और क्रिया पर आधारित उपचार तथा कॉलेज के डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चलते हैं। आवासीय स्वास्थ्य शिविर सात दिन से लेकर कई हफ़्तों तक के होते हैं, जिनमें चिकित्सकीय जाँच और व्यक्तिगत अभ्यास तालिका शामिल रहती है। मुंबई और दिल्ली में भी केंद्र हैं।
पीठ दर्द, रक्तचाप, मधुमेह या लंबे तनाव में योग का सहारा ढूँढ रहे लोगों के लिए यह ठीक बैठता है, क्योंकि अभ्यास डॉक्टर की राय के साथ चलता है। पुणे से लगभग डेढ़ घंटा और मुंबई से ढाई घंटा लगता है, इसलिए रोज़ आना-जाना व्यावहारिक नहीं। परिसर की दिनचर्या सुबह जल्दी शुरू होती है और सुविधाएँ आरामदेह रिज़ॉर्ट जैसी नहीं, सादी हैं।
पता: स्वामी कुवलयानंद मार्ग, लोनावला, महाराष्ट्र 410403
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